
भागलपुर (टाउन हॉल) | उर्दू निदेशालय (मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग) और जिला प्रशासन की ओर से शनिवार (7 फरवरी 2026) को टाउन हॉल में ‘फ़रोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा’ का भव्य आयोजन किया गया। डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी, डीडीसी और संयुक्त निदेशक समेत कई अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
1. DM का दिलचस्प बयान: “तुकबंदी के लिए उर्दू जरूरी”
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में उर्दू को भारतीय भाषा बताते हुए कई रोचक बातें कहीं:
- बॉलीवुड कनेक्शन: उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में ऐसा कोई गीत नहीं है जिसमें उर्दू लफ्जों का प्रयोग न हो, क्योंकि उर्दू के बिना गानों में तुकबंदी (Rhyming) नहीं बनती।
- नेमप्लेट: उन्होंने बताया कि उर्दू राज्य की द्वितीय राजभाषा है। सम्मान के तौर पर मेरे आवास के बाहर नेमप्लेट हिंदी के साथ-साथ उर्दू में भी लगी है।
- बचपन की याद: डीएम ने बताया कि बचपन में उन्होंने उर्दू सीखने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में विज्ञान (Science) की पढ़ाई में इतने मशगूल हो गए कि उर्दू पीछे छूट गई।
- नसीहत: उन्होंने कहा कि ऐसे छोटे-छोटे मुशायरे प्रखंड स्तर (Block Level) पर भी होने चाहिए।
2. मंच से गूंजा- “किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए”
कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक (जनसंपर्क) नागेंद्र कुमार गुप्ता ने मुनव्वर राणा और निदा फाजली के शेर पढ़कर माहौल को शायराना बना दिया। उन्होंने पढ़ा:
“अपना गम लेकर कहीं और न जाया जाए, घर में बिखरी हुई चीजों को सजाया जाए।
घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूं कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए।”
उन्होंने एक और मशहूर शेर पढ़ा- “कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीं तो कहीं आसमान नहीं मिलता।”
3. सेमिनार और मुशायरा: शिक्षकों को मिली ट्रेनिंग
- वर्कशॉप: प्रशिक्षक फुरकान खान ने शिक्षकों को बुनियादी स्तर पर बच्चों को पढ़ाने के गुर सिखाए।
- मुशायरा: दूसरे सत्र में शायरों ने समां बांध दिया। फरहत हुसैन खुश्दिल, काजिम अशरफी, मंजर इमाम शफ़क़ और कलीम आज़र समेत कई शायरों ने अपना कलाम पेश किया।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में डीडीसी, एडीएम दिनेश राम, जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रभारी पदाधिकारी (उर्दू कोषांग) सुभाषिनी प्रसाद, उर्दू परामर्श समिति की सदस्य शबाना दाऊद और मंच संचालक मो. सादिक समेत जिले के तमाम उर्दू प्रेमी मौजूद रहे।


