
पटना :बिहार में हरित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल शुरू होने जा रही है। भोजपुर जिले के कोइलवर स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान परिसर में जल्द ही ‘अर्बन फॉरेस्ट’ विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है, बल्कि संस्थान के मरीजों और आसपास के लोगों को स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण भी उपलब्ध कराना है।
वन विभाग द्वारा इस परियोजना को अत्याधुनिक मियावाकी तकनीक के जरिए विकसित किया जाएगा, जो कम समय में घना और प्राकृतिक जंगल तैयार करने के लिए जानी जाती है। इस तकनीक के तहत पौधों को सघन रूप से लगाया जाता है, जिससे उनकी वृद्धि तेज होती है और कुछ ही वर्षों में क्षेत्र हरे-भरे जंगल में तब्दील हो जाता है।
10-12 एकड़ क्षेत्र में विकसित होगा हरित क्षेत्र
परियोजना के तहत संस्थान परिसर में करीब 10 से 12 एकड़ क्षेत्र में पौधारोपण किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने पहले ही खाली पड़ी जमीनों की पहचान कर विस्तृत मैपिंग पूरी कर ली है। ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जहां वर्तमान में कोई निर्माण कार्य नहीं है और भविष्य में भी निर्माण की संभावना नहीं है, ताकि जंगल का स्वरूप लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
प्रारंभिक कार्य शुरू, 500 बांस गैबियन लगाए गए
वन विभाग ने इस दिशा में प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया है। अब तक करीब 500 बांस के गैबियन (बांस से बने संरचनात्मक फ्रेम) लगाए जा चुके हैं, जो पौधारोपण के लिए आधार तैयार करने में मदद करेंगे। योजना के अनुसार मानसून सीजन के दौरान, यानी जून-जुलाई में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा और अक्टूबर-नवंबर तक यह क्षेत्र घने अर्बन फॉरेस्ट का रूप लेने लगेगा।
5000 गैबियन लगाने की व्यापक योजना
डीएफओ प्रद्युमन गौरव के अनुसार, पूरे प्रोजेक्ट के तहत लगभग 5000 बांस गैबियन लगाए जाने की योजना है। चिन्हित क्षेत्रों में ब्लॉक प्लांटेशन के साथ-साथ परिसर और सड़कों के किनारे खाली स्थानों पर भी पौधे लगाए जाएंगे, ताकि हरित क्षेत्र का विस्तार अधिकतम हो सके।
विविध प्रजातियों से बढ़ेगी जैव विविधता
इस अर्बन फॉरेस्ट में विभिन्न प्रकार के पौधों को शामिल किया जाएगा, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। इसमें छायादार और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष जैसे बांस, शीशम, पीपल, बरगद, गुलमोहर और जामुन लगाए जाएंगे। इसके साथ ही औषधीय पौधों का भी रोपण किया जाएगा, जिससे यह क्षेत्र न केवल हरित बल्कि उपयोगी भी बने।
मियावाकी तकनीक से तेजी से होगा विकास
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मियावाकी तकनीक के जरिए पौधों को एक विशेष घनत्व में लगाया जाता है, जिससे वे तेजी से बढ़ते हैं और प्राकृतिक जंगल जैसा स्वरूप ले लेते हैं। इस तकनीक का उपयोग शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के लिए प्रभावी माना जाता है।
फिलहाल इस परियोजना के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है और स्वीकृति मिलने के बाद बड़े पैमाने पर पौधारोपण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अर्बन फॉरेस्ट से न केवल पर्यावरण संतुलन बेहतर होगा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के मरीजों को भी हरियाली और शुद्ध वातावरण का सकारात्मक प्रभाव मिलेगा। यह पहल राज्य में शहरी वानिकी (Urban Forestry) के क्षेत्र में एक उदाहरण साबित हो सकती है।


