- संस्कारों का उत्सव: जागृत युवा समिति के तत्वावधान में बुढ़ानाथ मंदिर में मातृ-पितृ पूजन दिवस का भव्य आयोजन; बच्चों ने माता-पिता के चरण धोकर लिया आशीर्वाद
- भावुक पल: आरती के दौरान जब बच्चों ने माफी मांगी तो छलक उठीं बड़ों की आंखें; विधायक रोहित पांडे और संघ प्रचारक सुरेंद्र जी ने की शुरुआत
- सांस्कृतिक छटा: फैंसी ड्रेस में बच्चों ने धरा महापुरुषों का रूप; प्राची, आराध्या और वेदज्ञ की प्रस्तुति ने मोहा मन
द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)
भागलपुर (Bhagalpur) की पावन धरती पर स्थित बाबा बुढ़ानाथ मंदिर (Baba Budhanath Mandir) का प्रांगण शनिवार को भारतीय संस्कारों और भावनाओं के सागर में डूबा नजर आया। यहां जागृत युवा समिति (Jagrit Yuva Samiti) की ओर से भव्य मातृ-पितृ पूजन (Parents Worship Day) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों परिवारों ने हिस्सा लिया और माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया
चरण स्पर्श और क्षमा प्रार्थना: सबसे भावुक पल
कार्यक्रम का सबसे मर्मस्पर्शी क्षण वह था जब बच्चों ने वैदिक परंपरा के अनुसार अपने माता-पिता की पूजा की, उनकी आरती उतारी और जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं
झांसी की रानी से लेकर विवेकानंद तक
कार्यक्रम में बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।
- प्रस्तुति: प्राची कुमारी, उमा आराध्या भारद्वाज, वेदज्ञ और अर्पिता की टीम ने मनमोहक कार्यक्रम पेश किए
- वेशभूषा प्रतियोगिता: बच्चों ने देश के महापुरुषों और देवी-देवताओं का रूप धरा। कोई झांसी की रानी के शौर्य में दिखा, तो कोई महाराणा प्रताप की वीरता में। किसी ने स्वामी विवेकानंद की ओजस्विता दिखाई, तो किसी ने मीराबाई की भक्ति और माँ दुर्गा के नौ रूपों का प्रदर्शन किया
इन्होंने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
कार्यक्रम का शुभारंभ भागलपुर विधायक रोहित पांडे, आरएसएस के विभाग प्रचारक सुरेन्द्र जी, वार्ड पार्षद संजय सिन्हा, माउंटी जोशी, कुमकुम देवी और सुरेश सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।
जागृत युवा समिति के प्यारे हिन्द ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत 2006 में संत आसाराम बापू ने की थी, जिसे आज कई संस्थाएं मना रही हैं। आयोजन को सफल बनाने में नीतीश यादव, मनीष दास, रोशन कुमार, बंटी मिश्रा और इंदु भूषण झा समेत पूरी टीम का योगदान रहा
मंदिर परिसर में बना सेल्फी प्वाइंट भी युवाओं और परिवारों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा
पाश्चात्य संस्कृति के दौर में ऐसे आयोजन संस्कारों की नींव मजबूत करते हैं।


