​भागलपुर सेंट्रल जेल के कैदी की मायागंज में मौत; पत्नी की हत्या के जुर्म में काट रहा था सजा, जमुई से हुआ था शिफ्ट

भागलपुर | 24 फरवरी, 2026: भागलपुर सेंट्रल जेल में बंद एक कैदी की मंगलवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान प्रमोद तांती के रूप में हुई है, जो पिछले चार वर्षों से सलाखों के पीछे था। पत्नी की हत्या के संगीन आरोप में सजा काट रहे प्रमोद ने जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (मायागंज) में अंतिम सांस ली।

जमुई जेल से सुरक्षा कारणों से लाया गया था भागलपुर

​प्रमोद तांती मूल रूप से जमुई जेल में निरुद्ध था। हालांकि, सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए करीब छह महीने पहले ही उसे भागलपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था। जेल प्रशासन के मुताबिक, प्रमोद पिछले चार सालों से अपनी पत्नी की हत्या के मामले में जेल की सजा भुगत रहा था।

10 दिनों से अस्पताल में चल रहा था इलाज

​कैदी की मौत के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के मुताबिक, करीब दस दिन पहले प्रमोद की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। जेल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए मायागंज अस्पताल के कैदी वार्ड में भर्ती कराया गया था। जेल प्रशासन ने इस संबंध में परिजनों को पहले ही सूचित कर दिया था।

मां का रो-रोकर बुरा हाल, घर में पसरा मातम

​प्रमोद की मौत की खबर मिलते ही उसके परिवार में कोहराम मच गया है। मृतक की मां सुकून देवी ने रोते हुए बताया कि 10 दिन पहले जब उन्हें बेटे की बीमारी की खबर मिली थी, तभी से पूरा परिवार अनहोनी की आशंका से डरा हुआ था। मंगलवार को जैसे ही मौत की अधिकारिक पुष्टि हुई, परिजनों का धैर्य जवाब दे गया।

मामले की होगी न्यायिक जांच

​नियम के अनुसार, जेल में बंद किसी भी कैदी की मौत होने पर मामले की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) कराई जाती है।

  • पोस्टमार्टम: शव का पोस्टमार्टम मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में डॉक्टरों की टीम द्वारा किया जाएगा।
  • जांच: पुलिस और जेल प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि मौत का कारण कोई पुरानी बीमारी थी या इलाज में कोई कमी रही।

द वॉयस ऑफ बिहार की रिपोर्ट: सेंट्रल जेल में कैदी की मौत ने एक बार फिर जेल के अंदर दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं और कैदियों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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