बिहार में वित्तीय ठगी पर ‘अमृत’ प्रहार: बिहार में जाली नोट और अवैध लोन ऐप्स की अब खैर नहीं

  • ​बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित 40वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCC) की बैठक में प्रदेश की वित्तीय सुरक्षा को लेकर कई ऐतिहासिक और कड़े फैसले लिए गए हैं।
  • ​भारत-नेपाल सीमा पर जाली नोटों के बढ़ते संचलन को रोकने के लिए सीमावर्ती बैंक शाखाओं में ‘नोट सॉर्टिंग मशीन’ लगाना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
  • ​बैंकों की फर्जी कॉल और धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों की पहचान के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नया ‘गोल्डन रूल’ जारी किया है, जिसके तहत 1600 से शुरू होने वाले नंबरों को ही वास्तविक माना जाएगा।
  • ​डिजिटल ठगी के खिलाफ ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) का उपयोग करते हुए ‘डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ के माध्यम से संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों को रीयल-टाइम में ट्रैक किया जाएगा।
  • ​अवैध वित्तीय निवेश और असुरक्षित जमा योजनाओं पर लगाम लगाने के लिए BUDS एक्ट 2019 और BPID एक्ट 2002 के तहत आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर और कार्रवाई का आदेश दिया गया है।

पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।

वित्तीय सुरक्षा का नया किला: बिहार में आम आदमी की गाढ़ी कमाई पर अब कोई डाका नहीं डाल सकेगा

बिहार की राजधानी पटना के पुराने सचिवालय स्थित सभागार में बुधवार को वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित इस 40वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCC) की बैठक में जिस तरह के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं, वे यह साफ करते हैं कि बिहार सरकार अब वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध बैंकिंग के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। बैठक में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल और भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार अरविंद की मौजूदगी ने इस रणनीति को और भी सशक्त बना दिया है।

नेपाल सीमा पर ‘जाली नोटों’ की नकेल: मशीनों से होगी पहरेदारी

बिहार के लिए भारत-नेपाल सीमा हमेशा से एक संवेदनशील इलाका रहा है, जहाँ से जाली भारतीय मुद्रा (FICN) के प्रवेश की खबरें आती रहती हैं। मुख्य सचिव ने इस चुनौती को सीधे तौर पर स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि सीमा के पास स्थित बैंकों की हर शाखा में उच्च तकनीक वाली ‘नोट सॉर्टिंग मशीन’ उपलब्ध होनी चाहिए। यह मशीनें न केवल नोटों की गिनती करेंगी, बल्कि उनके कागज़ और स्याही की सूक्ष्म जांच कर जाली नोटों को सिस्टम में प्रवेश करने से पहले ही पकड़ लेंगी। इसके साथ ही, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की सुविधा के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिक से अधिक अधिकृत ‘करेंसी एक्सचेंज’ केंद्र स्थापित करने को कहा गया है, ताकि लोग अवैध दलालों के चंगुल में न फंसें।

पहचानिए असली बैंक: ‘1600’ और ‘.in’ का नया सुरक्षा सूत्र

बैठक में भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक ने एक ऐसी जानकारी साझा की जो हर आम नागरिक के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी। अक्सर लोग बैंक के नाम पर आने वाली फर्जी कॉल्स से ठगी का शिकार हो जाते हैं। अब नियम यह है कि बैंकों द्वारा की जाने वाली आधिकारिक और वास्तविक कॉल केवल ‘1600’ से शुरू होने वाले नंबरों से ही आएंगी। यदि इसके अलावा किसी अन्य नंबर से बैंक के नाम पर कॉल आती है, तो वह संभावित धोखाधड़ी हो सकती है।

​इतना ही नहीं, वेबसाइटों की दुनिया में भी भ्रम दूर किया गया है। बैंकों की आधिकारिक वेबसाइट के लिंक के अंत में केवल और केवल ‘.in’ होना अनिवार्य है। ठग अक्सर लुभावने डोमेन नेम का उपयोग कर फर्जी साइट बनाते हैं, लेकिन अब बिहार की जनता को जागरूक किया जा रहा है कि वे डोमेन के अंत में ‘.in’ देखकर ही अपनी गोपनीय जानकारी साझा करें।

कानून का शिकंजा: BUDS और BPID एक्ट के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई

गरीबों के पैसे लेकर चंपत होने वाली ‘चिट फंड’ और ‘निधि’ कंपनियों के खिलाफ बिहार में अब कानूनी घेराबंदी तेज होगी। ‘बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स’ (BUDS) एक्ट 2019 और ‘बिहार प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स ऑफ डिपॉजिटर्स’ (BPID) एक्ट 2002 की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि फाइलों को लटकाने का समय अब बीत चुका है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को निर्देश दिए गए हैं कि जैसे ही किसी संस्था द्वारा अवैध जमा योजना चलाने की सूचना मिले, उसके खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए। इसी कड़ी में ‘पुर्णोदय निधि लिमिटेड’ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जबकि ‘सम्रद्ध बेस्टविन माइक्रो फाइनेंस’ जैसी संदिग्ध संस्थाओं को रडार पर रखा गया है।

एआई (AI) का पहरा: धोखाधड़ी की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग

तकनीक के इस दौर में अब पुलिस और प्रशासन भी ‘स्मार्ट’ हो रहे हैं। आरबीआई ने बैठक में ‘डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ (DPIP) की शुरुआत के बारे में विस्तार से बताया। यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर वास्तविक समय में यह पता लगा लेता है कि कौन सा ट्रांजेक्शन संदिग्ध है। यदि किसी खाते में असामान्य तरीके से पैसे आ रहे हैं या जा रहे हैं, तो एआई सिस्टम उसे तुरंत ‘फ्लैग’ कर देगा, जिससे बैंक और पुलिस समय रहते कार्रवाई कर सकेंगे। इसके साथ ही, ‘नाइट्रोफिन फाइनेंशियल’ जैसे अवैध लोन ऐप्स, जो लोगों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करते थे, उन्हें साइबर सेल की मदद से डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटवा दिया गया है।

मैथिली और भोजपुरी में जागरूकता: जब अपनी भाषा में मिलेगा अलर्ट

प्रशासन का मानना है कि केवल कानून बना देना काफी नहीं है, जनता का जागरूक होना सबसे जरूरी है। इसके लिए वित्त विभाग और आरबीआई ने सोशल मीडिया के साथ-साथ रेडियो का भी सहारा लिया है। बिहार के ग्रामीण अंचलों तक पहुँचने के लिए मैथिली और भोजपुरी भाषाओं में विशेष ‘रेडियो जिंगल्स’ तैयार किए गए हैं। जब लोग अपनी क्षेत्रीय भाषा में ठगी के तरीकों और उनसे बचने के उपायों के बारे में सुनेंगे, तो वे अधिक सतर्क होंगे। यह संचार क्रांति बिहार के सुदूर गांवों में रहने वाले उन बुजुर्गों और किसानों के लिए वरदान साबित होगी जो अक्सर डिजिटल दुनिया की पेचीदगियों को नहीं समझ पाते।

सहकारी बैंकों में सुधार और भविष्य की राह

बैठक का एक प्रमुख हिस्सा राज्य के सहकारी बैंकों की स्थिति पर भी केंद्रित रहा। मुख्य सचिव ने इन बैंकों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और उनकी स्थिति में सुधार के लिए नियमित अंतराल पर समीक्षा बैठकें आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि बैंकों, प्रशासन और पुलिस के बीच सूचनाओं का साझाकरण (Information Sharing) और बेहतर होना चाहिए। यदि एक विभाग के पास किसी ठग कंपनी की जानकारी है, तो वह तुरंत दूसरे विभाग तक पहुँचनी चाहिए ताकि जनता की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखा जा सके।

सुरक्षित निवेश, समृद्ध बिहार

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के नेतृत्व में हुई यह बैठक बिहार के वित्तीय इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। जाली नोटों की मशीन से लेकर एआई आधारित निगरानी और क्षेत्रीय भाषाओं में जागरूकता अभियान—यह सब मिलकर एक ऐसा सुरक्षा तंत्र बना रहे हैं जहाँ अपराधी के लिए कोई सुराख नहीं बचेगा। बिहार सरकार का यह संदेश साफ है: विकास की दौड़ में हम आगे बढ़ेंगे, लेकिन अपनी जनता की मेहनत की कमाई की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे।

​www.voiceofbihar.in

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