
पटना। बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रहा है, लेकिन इस बड़े राजनैतिक अनुष्ठान से ठीक पहले बुधवार की शाम पटना की सड़कों पर आध्यात्मिकता और आस्था का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। राजधानी के नेहरू पथ स्थित राजवंशी नगर के ऐतिहासिक पंचरूपी हनुमान मंदिर में उस समय एक अलग ही आभा बिखरी, जब देश के गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सामूहिक रूप से भगवान बजरंगबली के चरणों में शीश नवाया। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं थी, बल्कि बिहार की सत्ता के पूर्ण विस्तार से पूर्व ‘संकटमोचन’ का आशीर्वाद लेने की एक गहरी परंपरा का निर्वहन था। बुधवार की देर शाम जब इन कद्दावर नेताओं का काफिला मंदिर परिसर में पहुँचा, तो शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
हनुमान जी की आरती और बिहार के उत्कर्ष की कामना
पंचरूपी हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने हाथ में आरती की थाल लेकर प्रभु की वंदना की। उनके साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी पूरी श्रद्धा के साथ भगवान हनुमान की आरती उतारी। मंदिर के गर्भगृह में मौजूद इन नेताओं ने काफी समय तक ध्यान लगाया और प्रभु से बिहार की तरक्की, सुख-शांति और समृद्धि का वरदान मांगा। राजनैतिक हलकों में इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि किसी भी बड़े कार्य की शुरुआत से पहले हनुमान जी की शरण में जाना सम्राट चौधरी की पुरानी कार्यशैली रही है, और अब इसमें अमित शाह की उपस्थिति ने इसे एक राष्ट्रीय संदेश में बदल दिया है। आरती के समय मंदिर का वातावरण इतना जीवंत था कि वहां मौजूद भक्तों ने भी जय श्रीराम और जय बजरंगबली के नारों से परिसर को गुंजायमान कर दिया।
कैबिनेट विस्तार की पूर्व संध्या पर आध्यात्मिक ऊर्जा
अमित शाह और नितिन नवीन का पटना आगमन गुरुवार को गांधी मैदान में होने वाले सम्राट चौधरी मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह के लिए हुआ है। 15 अप्रैल को सरकार गठन के बाद यह पहला बड़ा विस्तार है, जिसमें करीब 30 मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है। इतने महत्वपूर्ण आयोजन से पहले राजवंशी नगर के इस प्राचीन मंदिर में मत्था टेकना यह दर्शाता है कि भाजपा और एनडीए का नेतृत्व अपनी राजनैतिक यात्रा को सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों के साथ जोड़कर देखना चाहता है। अमित शाह, जिन्हें भारतीय राजनीति का चाणक्य कहा जाता है, उनका मंदिर में यूं सहज भाव से प्रार्थना करना समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी उस छवि को और मजबूत किया है जिसमें वे खुद को जनता का सेवक और सनातन का प्रहरी मानते हैं।
भव्य स्वागत और मंदिर न्यास की मुस्तैदी
पंचरूपी हनुमान मंदिर पहुँचने पर नेताओं का स्वागत अत्यंत गरिमापूर्ण तरीके से किया गया। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष और पूर्व विधान पार्षद प्रो. रणवीर नंदन ने गृह मंत्री और मुख्यमंत्री की अगवानी की। मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि आम भक्तों को परेशानी न हो और विशिष्ट अतिथियों की पूजा निर्विघ्न संपन्न हो सके। इस पावन अवसर पर मंदिर न्यास समिति के सदस्य और मीडिया समन्वयक आलोक कुमार, सदस्य प्रेम कुमार, गोल्ड मैन के नाम से प्रसिद्ध प्रेम सिंह भी सक्रिय दिखे। इन लोगों ने नेताओं को मंदिर की ऐतिहासिकता और पंचरूपी स्वरूप के महत्व के बारे में जानकारी दी।
मंदिर के मुख्य पुजारियों—शिवकांत झा, संतोष तिवारी, बिरजु मिश्रा और सुबोध तिवारी—ने पूरे विधि-विधान से विशेष संकल्प कराया। पूजन सामग्री से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक में मंदिर के कर्मी ओमप्रकाश और संजीव रंजन ने अपनी महती भूमिका निभाई। मंदिर परिसर के बाहर भी सुरक्षा के कड़े घेरे के बावजूद सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग अपने नेताओं की एक झलक पाने के लिए घंटों प्रतीक्षा करते रहे।
गांधी मैदान के ‘महायज्ञ’ की तैयारी
बुधवार की इस पूजा का सीधा संबंध गुरुवार के उस ‘महायज्ञ’ से है जो गांधी मैदान में दोपहर 12 बजे शुरू होगा। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार अब अपने पूर्ण स्वरूप में आने वाली है। गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी यह स्पष्ट करती है कि केंद्र सरकार बिहार के विकास को लेकर कितनी गंभीर है। पूजा संपन्न करने के बाद नेताओं ने मंदिर के पुजारियों से आशीर्वाद लिया और कुछ समय तक मंदिर की वास्तुकला को भी निहारा।
आध्यात्मिक जगत में मान्यता है कि पंचरूपी हनुमान की पूजा से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है। राजवंशी नगर के इस मंदिर की ख्याति दूर-दराज तक है, और यहाँ मत्था टेककर नेताओं ने बिहार की जनता को यह संदेश दिया है कि उनके शासन का मूल आधार जनसेवा और लोक-कल्याण ही रहेगा। बुधवार की रात जब यह काफिला मंदिर से निकला, तो पटना की हवाओं में एक नया उत्साह और राजनैतिक स्थिरता का भाव महसूस किया जा रहा था।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति और सामाजिक संदेश
इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान केवल राजनैतिक चेहरे ही नहीं, बल्कि कई गणमान्य नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद थे। सभी ने एक सुर में इस बात की सराहना की कि व्यस्ततम राजनैतिक कार्यक्रमों के बीच भी नेताओं ने ईश्वर की भक्ति के लिए समय निकाला। मंदिर न्यास के सदस्यों ने बताया कि यह मंदिर पटना की पहचान है और यहाँ से शुरू होने वाला कोई भी काम हमेशा सफल होता है।
पूजा-अर्चना के बाद अमित शाह और सम्राट चौधरी ने संक्षिप्त रूप से मंदिर के पुजारियों का आभार व्यक्त किया। मंदिर की ओर से उन्हें प्रसाद और अंगवस्त्र भेंट किया गया। यह क्षण बिहार की उस साझा संस्कृति का प्रतीक था जहाँ राजनीति और धर्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक बनकर लोकहित की कामना करते हैं। अब सबकी नजरें कल की उस धूप और गांधी मैदान के उस मंच पर टिकी हैं, जहाँ से बिहार के विकास की नई शपथ गूंजने वाली है। फिलहाल, पटना की रात बजरंगबली के आशीर्वाद की छाया में शांत और भविष्य के प्रति आशान्वित दिख रही है।


