मिडिल ईस्ट में मचे कोहराम के बीच PM मोदी का बड़ा कदम! ईरान के राष्ट्रपति को किया फोन; बोले- ‘बातचीत और डिप्लोमेसी ही एकमात्र रास्ता’

HIGHLIGHTS:

  • शांति की पहल: प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर की लंबी चर्चा।
  • भारत की चिंता: मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, आम नागरिकों की मौत और इंफ्रास्ट्रक्चर को हो रहे नुकसान पर जताई गहरी फिक्र।
  • टॉप प्रायोरिटी: भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा (Oil/Gas) की निर्बाध सप्लाई भारत के लिए सबसे जरूरी।
  • दो टूक संदेश: पीएम मोदी ने दोहराया— जंग किसी मसले का हल नहीं, संवाद और कूटनीति से ही निकलेगा समाधान।

युद्ध के मुहाने पर दुनिया, ‘शांति दूत’ बनकर उभरे मोदी: ईरान को दिया कड़ा संदेश

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और इजराइल-ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने पूरी दुनिया की सांसें अटका रखी हैं। इस वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर ‘विश्व मित्र’ की भूमिका निभाते हुए ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन को फोन घुमाया है। पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि भारत क्षेत्र में शांति चाहता है और किसी भी कीमत पर भारतीय हितों और नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।

ऊर्जा और अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा: मोदी का ‘मास्टरस्ट्रोक’

​ईरान और इजराइल के बीच जारी इस जंग का सीधा असर भारत की रसोई और जेब पर पड़ सकता है।

  • तेल की सप्लाई: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पेजेशकियन से स्पष्ट कहा कि ऊर्जा के परिवहन (Transportation) में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।
  • भारतीय प्रवासियों की चिंता: खाड़ी देशों में करोड़ों भारतीय काम करते हैं, जिनमें बिहार और यूपी के लोगों की संख्या काफी अधिक है। उनकी सलामती के लिए पीएम मोदी ने ईरान से सहयोग मांगा है।

कूटनीति का ‘बैलेंसिंग एक्ट’

​भारत ने एक तरफ इजराइल के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखा है, तो वहीं दूसरी ओर ईरान जैसे पुराने मित्र के साथ भी संपर्क साधा है। पीएम मोदी का यह फोन कॉल वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और ‘युद्ध नहीं, शांति’ के विजन को मजबूती देता है।

VOB का नजरिया: क्या मोदी की अपील का होगा असर?

प्रधानमंत्री मोदी का ईरान के राष्ट्रपति को फोन करना केवल एक औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि एक ‘स्ट्रेटेजिक मैसेज’ है। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भी पीएम मोदी ने कहा था— “यह युद्ध का युग नहीं है।” अब मिडिल ईस्ट में उनका यह हस्तक्षेप बताता है कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कितना गंभीर है। अगर ईरान और इजराइल के बीच तनाव बढ़ता है, तो इसका सबसे ज्यादा असर कच्चा तेल (Petroleum) महंगा होने के रूप में भारत पर पड़ेगा। पीएम मोदी की यह ‘टेलीफोनिक डिप्लोमेसी’ आग बुझाने की एक ईमानदार कोशिश है।

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