अमडंडा थाना वायरल वीडियो मामला: संदिग्ध युवक के वीडियो से मचा हड़कंप, SSP ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश

भागलपुर, 26 जून 2026: भागलपुर जिले के अमडंडा थाना परिसर से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में एक संदिग्ध युवक थाना परिसर के अंदर माचिस जलाकर किसी संदिग्ध पदार्थ का सेवन करता हुआ नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के साथ कई तरह के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि अमडंडा थाना पुलिस ने संबंधित युवक को हिरासत में लेने के बाद कथित रूप से अवैध धनराशि लेकर छोड़ दिया। इस दावे ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। स्थानीय लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), भागलपुर ने तत्काल संज्ञान लिया है। SSP कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वायरल वीडियो एवं उससे जुड़े आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

इस मामले की निष्पक्ष, विस्तृत और तथ्यपरक जांच के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), कहलगांव-1 को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच कर यथाशीघ्र अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपें। जांच के दौरान वीडियो की सत्यता, उसमें दिख रहे व्यक्ति की पहचान, थाना परिसर में उसकी मौजूदगी और लगाए गए आरोपों के सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।

पुलिस प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं, तो मामले में शामिल दोषी पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। भागलपुर पुलिस ने यह भी दोहराया कि भ्रष्टाचार, अनियमितता या मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि भागलपुर पुलिस निष्पक्ष, पारदर्शी और विधिसम्मत कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि जांच पूरी होने तक किसी भी अपुष्ट या भ्रामक सूचना को फैलाने से बचें तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।

अब इस पूरे मामले पर सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि वायरल वीडियो और उससे जुड़े आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल एक थाने की कार्यशैली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

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