- सरहद पर ‘हर-हर महादेव’: भारत-भूटान सीमा पर स्थित अलीपुरद्वार के जोड़ा पहाड़ पर महाशिवरात्रि की धूम; साल में सिर्फ 3 दिन खुलने वाली महाकाल गुफा में दर्शन के लिए पहुंचे लाखों भक्त।
- सांप्रदायिक मिसाल: धर्म की दीवारें टूटीं; किशनगंज जिला परिषद सदस्य नासिक नादिर समेत कई मुस्लिम भक्तों ने भी कठिन चढ़ाई कर बाबा के दरबार में टेका मत्था।
- सेवा ही धर्म: किशनगंज महाकाल सेवा समिति ने लगाया विशाल लंगर; पिछले 15 सालों से निभा रहे परंपरा, भक्तों के लिए भोजन-दवा की मुफ्त व्यवस्था।
द वॉयस ऑफ बिहार (किशनगंज/अलीपुरद्वार)
महाशिवरात्रि (Mahashivratri) के मौके पर आस्था की एक अनोखी तस्वीर भारत-भूटान सीमा (Indo-Bhutan Border) से सामने आई है। यहां अलीपुरद्वार के जोड़ा पहाड़ (Joda Pahad) स्थित महाकाल बाबा की गुफा में जलाभिषेक के लिए भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि धर्म और मजहब की दीवारें भी छोटी पड़ गईं। दुर्गम रास्तों और जंगलों के बीच स्थित इस पवित्र गुफा के पट साल में केवल तीन दिनों के लिए खुलते हैं, जिसके चलते यहां लाखों की भीड़ जुटी है।
मुस्लिम भक्तों ने पेश की नजीर
इस वर्ष यहां का नजारा सबसे खास रहा। सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए कई मुस्लिम भक्तों ने भी बाबा भोलेनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई।
- एकजुटता: किशनगंज के जिला परिषद सदस्य नासिक नादिर (Nasik Nadir) सहित कई मुस्लिम श्रद्धालुओं ने हजारों फीट की कठिन चढ़ाई पूरी कर बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया और मत्था टेका। यह दृश्य भारतीय संस्कृति की ‘अनेकता में एकता’ को चरितार्थ कर रहा था।
22,000 फीट की कठिन चढ़ाई
भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। लोग लंबी वाहन यात्रा के बाद लगभग 22,000 फीट की बेहद कठिन और खड़ी चढ़ाई पैदल तय कर गुफा तक पहुँच रहे हैं। ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरा सीमावर्ती इलाका गूंज रहा है।
किशनगंज के युवाओं की सेवा
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए किशनगंज महाकाल सेवा समिति (Kishanganj Mahakal Seva Samiti) ने सेवा का मोर्चा संभाल रखा है।
- लंगर: समिति के अध्यक्ष सुचित सिंह राणा ने बताया कि पिछले 15 वर्षों की तरह इस बार भी विशाल लंगर का आयोजन किया गया है।
- सुविधाएं: सैकड़ों वॉलंटियर्स दिन-रात सेवा में जुटे हैं। भक्तों के लिए निःशुल्क भोजन, नाश्ता, चाय और दवाइयों की पूरी व्यवस्था की गई है।
सीमा पर आस्था और एकता की यह खबर दिल छू लेने वाली है।


