अकबरनगर फोरलेन पर कार ने बाइक सवार ‘राजा’ को कुचला, दरोगा बनने का सपना रह गया अधूरा

अकबरनगर। भागलपुर-मुंगेर की सीमा पर स्थित अकबरनगर थाना क्षेत्र से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने न केवल एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि खाकी वर्दी पहनने का ख्वाब देख रहे एक होनहार युवक के सफर पर भी हमेशा के लिए विराम लगा दिया। सोमवार की देर शाम मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन पर एक ईंट भट्ठे के समीप काल बनकर आई एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार युवक को ऐसी टक्कर मारी कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मरने वाला युवक कोई साधारण राहगीर नहीं, बल्कि बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) बनने की पहली सीढ़ी चढ़ चुका निशांत कुमार उर्फ राजा था। विडंबना देखिए कि जिस बाइक को वह एक पुराने हादसे के बाद ठीक करवाकर और उसकी सर्विसिंग कराकर नई जैसी चमक के साथ घर लौट रहा था, वही बाइक उसके अंतिम सफर का जरिया बन गई। इस हादसे ने एक बार फिर फोरलेन पर बेकाबू रफ्तार और अधूरे निर्माण के बीच दौड़ते वाहनों के खतरे को उजागर कर दिया है।

भीषण भिड़ंत और मौके पर ही थम गई धड़कन

​हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद बाइक और कार दोनों के परखच्चे उड़ गए। सोमवार की शाम जब सूरज ढल चुका था और अंधेरा पैर पसार रहा था, तभी अकबरनगर थाना क्षेत्र के भट्ठे के पास एक जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुल्तानगंज की ओर से आ रही एक अनियंत्रित कार ने सामने से आ रही निशांत की बाइक में सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि निशांत हवा में कई फीट ऊपर उछला और सड़क पर जा गिरा। सिर में गंभीर चोट लगने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसने अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ दिया।

​दुर्घटना के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन निशांत के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। वहीं, कार चालक हादसे के बाद अपनी गाड़ी छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही अकबरनगर थाना प्रभारी राहुल कुमार दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस ने तुरंत दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को कब्जे में लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की।

दरोगा बनने का था जुनून, रील की दुनिया में भी था लोकप्रिय

​मृतक निशांत कुमार उर्फ राजा (24 वर्ष) सुल्तानगंज के काली स्थान दुधैला (वार्ड 22) निवासी कैलाश प्रसाद मंडल का पुत्र था। निशांत का व्यक्तित्व बहुआयामी था। एक तरफ वह बिहार पुलिस में दारोगा बनने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था, तो दूसरी तरफ वह सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहता था। हाल ही में उसने बिहार एसआई (Sub-Inspector) की प्रारंभिक परीक्षा (PT) उत्तीर्ण की थी और मुख्य परीक्षा व शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी में जुटा था। वह अक्सर अपनी नई बाइक के साथ इंस्टाग्राम पर रील बनाकर अपलोड करता था, जहाँ उसके चाहने वालों की एक बड़ी संख्या थी। उसकी रील में दिखने वाली वही चकाचौंध अब उसकी प्रोफाइल पर एक मौन याद बनकर रह गई है।

​निशांत की माँ गीता देवी एक शिक्षिका हैं और उन्होंने अपने बेटे को उच्च शिक्षा दिलाने और उसे एक अधिकारी बनाने के लिए काफी संघर्ष किया था। परिवार में दो बड़ी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। निशांत इकलौता बेटा था, जिस पर पूरे परिवार की उम्मीदें टिकी थीं। उसकी मौत की खबर जैसे ही दुधैला पहुँची, पूरे गांव में मातम पसर गया। थाने पहुँचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। माँ गीता देवी बार-बार अपने बेटे के नाम की पुकार लगा रही थीं, जिसे सुनकर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों की आँखें भी नम हो गईं।

जब्त बाइक को छुड़ाकर लौटा था, नियति ने वहीं दोबारा घेरा

​इस पूरी घटना में एक अजीब और डरावना संयोग भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि निशांत की यही बाइक कुछ समय पहले एक अन्य दुर्घटना का शिकार हो गई थी, जिसके बाद अकबरनगर पुलिस ने इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया था। निशांत सोमवार को ही अपनी उस बाइक को पुलिस से छुड़ाने के बाद भागलपुर स्थित सर्विस सेंटर ले गया था। वहां से बाइक की पूरी सर्विसिंग कराने और उसे बिल्कुल नई जैसी स्थिति में वापस लेकर वह घर लौट रहा था।

​उसे क्या पता था कि जिस बाइक को वह दोबारा इस्तेमाल करने के लिए इतना उत्साहित था, वही उसके जीवन के अंतिम पलों का गवाह बनेगी। अकबरनगर थाना क्षेत्र के जिस फोरलेन मार्ग से वह गुजर रहा था, वह अभी आधिकारिक तौर पर यातायात के लिए पूरी तरह खुला नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ वाहनों की रफ़्तार पर कोई अंकुश नहीं है।

अधूरे फोरलेन पर रफ़्तार का तांडव: सुरक्षा भगवान भरोसे

​मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन अब स्थानीय लोगों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बनता जा रहा है। अकबरनगर के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है, लेकिन बड़े और छोटे वाहन यहाँ निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करते हुए अंधाधुंध भागते हैं। चूंकि सड़क नई और चौड़ी है, इसलिए चालक इसे रेसिंग ट्रैक समझ बैठते हैं।

फोरलेन पर हादसों के मुख्य कारण:

  • अधूरा निर्माण: सड़क के कई हिस्सों में अभी भी डिवाइडर और संकेतकों (Indicators) की कमी है।
  • गति सीमा का उल्लंघन: यहाँ वाहनों की गति पर नजर रखने के लिए कोई स्पीड गन या कैमरे नहीं लगाए गए हैं।
  • गलत दिशा में ड्राइविंग: फोरलेन पूरी तरह शुरू न होने के कारण अक्सर वाहन चालक गलत दिशा (Wrong Side) से भी गाड़ियां निकालते हैं, जो आमने-सामने की टक्कर का कारण बनता है।
  • अंधेरे का खतरा: स्ट्रीट लाइट्स की कमी के कारण शाम के समय विजिबिलिटी (दृश्यता) कम हो जाती है, जिससे मोड़ और सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते।

​निशांत के साथ हुआ हादसा भी इसी तेज रफ़्तार का नतीजा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक फोरलेन का काम पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाता, तब तक भारी वाहनों और अनियंत्रित रफ़्तार पर रोक लगाई जाए।

पुलिसिया कार्रवाई और आगामी कदम

​अकबरनगर थाना प्रभारी राहुल कुमार ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त कार और बाइक को जब्त कर लिया गया है। कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर मालिक और चालक की पहचान की जा रही है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है और साक्ष्य संकलित किए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल भेज दिया गया है। थाना प्रभारी ने कहा कि फरार कार चालक की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

​निशांत की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। एक होनहार छात्र, जो समाज की रक्षा के लिए पुलिस बल में शामिल होना चाहता था, खुद एक लापरवाह चालक की भेंट चढ़ गया। उसकी माँ की सिसकियां और पिता की खामोशी यह सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक रफ़्तार की हवस मासूम और होनहार जिंदगियों को निगलती रहेगी। दुधैला गांव में आज चूल्हा नहीं जला है, हर कोई अपने ‘राजा’ की अंतिम विदाई की प्रतीक्षा कर रहा है।

​सड़क सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन केवल एक चालान का विषय नहीं है, बल्कि यह निशांत जैसे हजारों युवाओं के सपनों की हत्या है। अकबरनगर की यह घटना भागलपुर जिले के प्रशासन के लिए एक अलार्म है कि वे फोरलेन पर सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दें। वरना, यह नई सड़क विकास की राह बनने के बजाय विनाश का गलियारा साबित होती रहेगी। निशांत की रील अब बंद हो चुकी है, लेकिन उसके पीछे छूटे सवाल आज भी हवा में तैर रहे हैं।

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