पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन जहां सदन के भीतर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने थे, वहीं सदन के बाहर भी एक रोचक लेकिन तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। मौका था उर्दू शिक्षकों की बहाली के मुद्दे पर प्रदर्शन का, जहां एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान और जेडीयू विधान पार्षद खालिद अनवर के बीच तीखा संवाद हो गया।
बैनर लेकर पहुंचे थे अख्तरुल ईमान, खालिद अनवर से हुई नोकझोंक
एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान आज विधानसभा परिसर में हाथों में ‘बिहार सरकार होश में आओ’ लिखा बैनर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आरोप था कि बिहार सरकार जानबूझकर उर्दू शिक्षकों की बहाली को रोक रही है, जबकि संस्कृत और हिंदी विषयों में नियुक्तियां की जा रही हैं।
इसी दौरान वहां से गुजर रहे जेडीयू एमएलसी खालिद अनवर से उनकी नजरें मिलीं और फिर शुरू हो गई सवाल-जवाब की सिलसिला।
अख्तरुल ईमान ने खालिद अनवर से उर्दू शिक्षकों की बहाली पर सीधा सवाल किया। जवाब में खालिद अनवर ने कहा कि “उर्दू के मामले में मैं आपके साथ हूं। नीतीश कुमार भी आपके साथ हैं।”
“उर्दू की कातिल है सरकार” – अख्तरुल ईमान का आरोप
विधायक अख्तरुल ईमान खालिद अनवर के जवाब से असहमत दिखे। उन्होंने कहा,
“सरकार उर्दू की कातिल बन गई है। हाईस्कूलों में उर्दू के शिक्षकों की बहाली नहीं हो रही। आप मुसलमानों के बीच जाकर सरकार की वकालत करते हैं, जवाब दीजिए।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार चालाकी से शिक्षा विभाग के मानक मंडल में बदलाव कर रही है।
“जहां पहले उर्दू शिक्षक की जगह होती थी, अब वहां संस्कृत के शिक्षकों की बहाली की जा रही है। एक ही शिक्षक से संस्कृत, भोजपुरी, अरबी समेत अन्य भाषाएं पढ़वाने की बात की जा रही है। यह उर्दू के अस्तित्व को खत्म करने की साजिश है।”
‘सदन के भीतर भी उठेगा मुद्दा’
अख्तरुल ईमान ने कहा कि वे इस मुद्दे को केवल सड़क पर नहीं छोड़ेंगे, बल्कि विधानसभा के भीतर भी मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने सरकार से उर्दू भाषियों के हक में संवैधानिक अधिकारों की बहाली की मांग की है।
ढाई करोड़ उर्दू भाषियों की उपेक्षा का आरोप
अख्तरुल ईमान ने कहा कि बिहार में लगभग ढाई करोड़ लोग उर्दू बोलते हैं, लेकिन उनके लिए शिक्षक बहाल नहीं किए जा रहे।
“यह सरकार का कातिलाना रवैया है, हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और हर मोर्चे पर इसका विरोध करेंगे।”
विधानसभा परिसर में रोचक दृश्य, तीखे संवाद के बीच दिखी मुस्कान भी
हालांकि बहस तीखी थी, लेकिन दोनों नेताओं के बीच कुछ देर के लिए हंसी-मजाक का लहजा भी देखने को मिला। यह दृश्य वहां मौजूद अन्य विधायकों और पत्रकारों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया।
बिहार में उर्दू शिक्षकों की बहाली को लेकर सरकार पर निशाना साधने वाले अख्तरुल ईमान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे को पीछे हटने वाले नहीं हैं। वहीं जेडीयू की ओर से भी फिलहाल स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है, जिससे यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तेज़ी से राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।


