
बिहार में सम्राट चौधरी की सरकार बनने और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जनता दल यूनाइटेड के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कई वरिष्ठ नेता और उनके समर्थक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
आनंद मोहन ने खोला मोर्चा
आनंद मोहन सबसे ज्यादा मुखर नजर आ रहे हैं। उनकी पत्नी लवली आनंद और बेटे चेतन आनंद जेडीयू में सक्रिय हैं। माना जा रहा है कि वह अपने बेटे को मंत्री बनवाना चाहते थे, लेकिन मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज हैं।
इसके बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व और नीतीश कुमार की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बयान दिए। जवाब में जेडीयू के कई नेताओं को उनके खिलाफ मैदान में उतारा गया।
संजय सिंह ने कहा:
“अगर इतना ही है तो इस्तीफा कराके मैदान में आ जाएं, चुनाव में पता चल जाएगा।”
वहीं भीष्म साहनी ने आरोप लगाया कि अति पिछड़ा वर्ग से आने वाली श्वेता गुप्ता को मंत्री बनाए जाने से आनंद मोहन नाराज हैं।
अरुण कुमार और ऋतुराज का मामला
पूर्व सांसद अरुण कुमार भी मंत्रिमंडल विस्तार से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। उनके बेटे ऋतुराज को मंत्री पद नहीं मिलने से नाराजगी की चर्चा है।
वशिष्ठ नारायण सिंह को नहीं मिली जिम्मेदारी
जेडीयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह को इस बार राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली। चर्चा है कि वह अपने बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने अब तक कोई बड़ा मौका नहीं दिया। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई नाराजगी जाहिर नहीं की है।
हरि नारायण सिंह की इच्छा अधूरी
हरि नारायण सिंह लगातार 10वीं बार विधायक बने हैं, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने खुलकर नाराजगी से इनकार किया है।
महेश्वर हजारी और श्याम रजक भी असंतुष्ट
महेश्वर हजारी और श्याम रजक के समर्थकों में भी नाराजगी की चर्चा है। श्याम रजक ने सोशल मीडिया लाइव के जरिए अपनी उपेक्षा पर इशारों में नाराजगी जाहिर की थी।
राजनीतिक जानकार क्या कहते हैं?
राजनीतिक विशेषज्ञ रणधीर कुमार का मानना है कि पार्टी के भीतर असंतोष अभी शुरुआती दौर में है और आने वाले समय में यह और बढ़ सकता है।
उनके मुताबिक,
“कुछ नेता अपने बेटों को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं, तो कुछ मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इन नाराज नेताओं को कैसे साधता है।”
फिलहाल जेडीयू के भीतर बढ़ती नाराजगी बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा करती दिख रही है।


