सरकारी बंगला खाली करने के बाद गायब मिला फर्नीचर.. तेजप्रताप के पुराने आवास को लेकर नया राजनीतिक बवाल, नए मंत्री ने उठाए सवाल

पटना के पॉश इलाके स्ट्रैंड रोड स्थित सरकारी बंगला एक बार फिर सुर्खियों में है। यह वही आवास है, जिसमें कुछ दिन पहले तक राजद नेता तेजप्रताप यादव रह रहे थे। अब जब उन्होंने बंगला खाली कर दिया है और यह आवास बिहार सरकार के मंत्री लखेंद्र पासवान को आवंटित किया गया है, तो मामला एक नए विवाद में बदल गया है।

जब मंत्री लखेंद्र पासवान पहली बार बंगले में पहुंचे, तो उन्हें जो हाल दिखा, उसने उन्हें भी हैरान कर दिया। उनका आरोप है कि बंगले से लगभग सारा फर्नीचर और जरूरी सामान गायब है। पंखे नहीं हैं, कुर्सियां नहीं हैं, एसी तक उखाड़ लिए गए हैं। यहां तक कि बल्ब और गेट के लैच भी नहीं बचे हैं।

मंत्री बोले – यह रहने लायक नहीं, खंडहर बना दिया गया है

मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि बंगले की हालत इतनी खराब है कि उसमें फिलहाल रहना संभव नहीं है। छत क्षतिग्रस्त है और कई हिस्सों में मरम्मत की जरूरत है। उन्होंने साफ कहा कि यह कोई निजी संपत्ति नहीं, बल्कि सरकारी आवास है और इसे इस हालत में छोड़ना नियमों के खिलाफ है।

उन्होंने पूरे मामले की जानकारी भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों को दे दी है और बंगले की स्थिति भी उन्हें दिखाई है।

फर्नीचर कहां गया? अनीसाबाद के ऑफिस में शिफ्ट करने का दावा

सूत्रों के अनुसार, बंगले में मौजूद फर्नीचर और अन्य सामान को अनीसाबाद रोड स्थित ‘LR भारत’ नाम से चल रहे कार्यालय में शिफ्ट किया गया है। यह ऑफिस तेजप्रताप यादव से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, इस पर तेजप्रताप की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यहीं हुआ था मकर संक्रांति का भोज

यही वह बंगला है, जहां कुछ ही दिन पहले तेजप्रताप यादव ने मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में उनके पिता लालू प्रसाद यादव, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री भी शामिल हुए थे। उस वक्त लालू यादव ने कहा था कि बेटे से कोई नाराजगी नहीं है, जिससे परिवार में सुलह की चर्चाएं तेज हो गई थीं।

नोटिस के बाद खाली करना पड़ा आवास

महुआ विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बाद तेजप्रताप यादव को 25 नवंबर 2025 को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था। नियमों के अनुसार, किसी पूर्व विधायक को एक महीने के भीतर आवास खाली करना होता है।

अब बंगले की हालत और गायब सामान को लेकर सवाल उठ रहे हैं—
क्या सरकारी संपत्ति का इस तरह इस्तेमाल नियमों का उल्लंघन है?
और अगर है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

राजनीतिक गलियारों में यह मामला अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

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