भागलपुर। सैंडिस कंपाउंड स्टेडियम में आयोजित भागलपुर क्रिकेट लीग (बीसीएल) सीजन-4 के रद्द होने के बाद बुधवार को भी मैदान में सन्नाटा पसरा रहा। मैच बंद होने के बाद आयोजकों की ओर से मैदान में की गई व्यवस्थाओं को समेटने का काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि, स्टेडियम में बना मंच अब भी पहले की तरह मौजूद है। प्रतियोगिता में खेलने वाले खिलाड़ियों पर पाबंदी लगने के बाद लीग को स्थगित करना पड़ा।
इस प्रतियोगिता में (बीसीए) और इसके अधीन विभिन्न क्रिकेट संघों से जुड़े सौ से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले रहे थे। बीसीए ने 3 जनवरी को बीसीएल को बिना मान्यता वाला और अवैध लीग बताते हुए अपने खिलाड़ियों के लिए सख्त चेतावनी जारी की थी। इसी चेतावनी के बाद आगे के मुकाबले नहीं कराए गए और लीग पूरी तरह ठप हो गई।
लीग के अचानक बंद होने का असर बाहर से आए खिलाड़ियों पर भी पड़ा है। जानकारी के अनुसार, दूसरे राज्यों से आए कई खिलाड़ी अपने-अपने स्थानों पर लौट चुके हैं। इस प्रतियोगिता में बिहार के अलावा पंजाब, पश्चिम बंगाल, झारखंड समेत अन्य राज्यों के खिलाड़ी भी खेल रहे थे।
इधर, आयोजकों की ओर से प्रतियोगिता बंद होने के बाद यह कहा गया था कि दो दिनों के भीतर तकनीकी समस्याओं को दूर कर लिया जाएगा, लेकिन अब तक इस मामले में न तो जिला क्रिकेट संघ और न ही आयोजकों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। इससे खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
दरअसल, विवाद की जड़ बीसीएल में (बीडीसीए) के लोगो के इस्तेमाल को लेकर है। जब बीसीए ने इस संबंध में जवाब-तलब किया तो आयोजकों की ओर से मामले से पल्ला झाड़ लिया गया। इसके बाद पूरे आयोजन की वैधता पर सवाल खड़े हो गए और प्रतियोगिता को रद्द करना पड़ा।
स्थानीय क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि बीसीएल जैसे आयोजन से युवा खिलाड़ियों को मंच मिलता है, लेकिन मान्यता और नियमों की अनदेखी ने पूरे आयोजन पर ग्रहण लगा दिया। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगे इस लीग को लेकर क्या फैसला लिया जाता है और खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।


