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प्रधान सचिव के निर्देश पर जांच के बाद मौत के आंकड़े की सच्चाई आयी सामने, मृतक को भी बता दिया स्वस्थ

ByRajkumar Raju

Jun 11, 2021

स्वास्थ्य विभाग पर मौत के आंकड़ों में हेराफेरी करने का जो आरोप लगा था, बुधवार को आंकड़ा जारी होने के बाद बह पुष्टहो गया। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के निर्देश पर जब पड़ताल की गयी तो कोरोना संक्रमितों के इलाज देखभाल को लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम की पोल ही खुल गयी। जिले में मरने वालों की संख्या में 34 अंकों की बढ़ोतरी हो गई।

प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रत्यय अमृत के निर्देश पर भागलपुर जिले में कोरोना से हुई मौतों की जांच शुरू की गयी। सिविल सर्जन व जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज के प्राचार्य की अगुवाई वाली चिकित्सकों की टीम ने जांच शुरू की तो 34 कोरोना मृतक ऐसे निकले जो स्वास्थ्य विभाग के रिपोर्ट में जीवित थे। इससे जिले में कुल कोरोना से हुई मौतों का जो आंकड़ा आठ जून तक 270 था, वह नौ जून को बढ़कर 304 पर पहुंच गया। यही कारण रहा कि मंगलवार तक जिले में कोरोना से ठीक होने की जो दर 98.37 प्रतिशत थी, जो बुधवार को 0.08 प्रतिशत की कमी के साथ 98.29 प्रतिशत पर आ गयी। जांच से स्वास्थ्य विभाग की सच्चाई आ गई सामने।

कई मृतकों के घर स्वास्थ्य विभाग पहुंचा भी नहीं था

34 कोरोना मृतकों की सख्या जो जिले में बढ़ी है, उनमें से सात ऐसे थे जिन तक कोरोना पॉजिटिव होने के बाद स्वास्थ्य विभाग पहुंच ही नहीं पाया और वे 10 दिन बाद कोरोना से ठीक होने वालों की कतार में शामिल हो गये थे, लेकिन परिजनों ने दावा किया उन तक स्वास्थ्य विभाग पहुंचा ही नहीं था। जबकि इनकी होम आइसोलेशन के दौरान ही इलाज के दौरान मौत हो गयी जिंदा को मृत घोषित करने के लिए परिजनों को कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट से लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र तक पदाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना पडा | यही कारण रहा कि आठ मई तक जिले में कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या जो 25178 थी, वह नौ मई को घटकर 25171 पर आ गयी।