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चीन के बाद दिल्ली में बन रहे स्मॉग टॉवर, करेंगे वायु प्रदूषण पर नियंत्रण

ByShailesh Kumar

Jun 11, 2021

देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए राजधानी दिल्ली में इसे रोकने के उपाय किए जा रहे हैं. दिल्ली में वायु प्रदूषण रोकने के लिए बनाए जा रहे हैं देश के पहले स्मॉग टावर. दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आनंद विहार और कनॉट प्लेस के पास स्मॉग टॉवर बनाए जाएंगे. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आनंद विहार में जबकि दिल्ली सरकार कनॉट प्लेस में बनवा रही है स्मॉग टावर. आपको बता दें कि अभी तक चीन के बाद भारत दूसरा ऐसा देश होगा जहां प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए स्मॉग टावर बनाए जाएंगे.

दिल्ली सरकार द्वारा कनॉट प्लेस के पास बाबा खड़ग सिंह मार्ग पर बनाए जा रहे स्मॉग टावर में लगभग 20 करोड़ रुपयों का खर्च आएगा. ये स्मॉग टॉवर 15 अगस्त तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. स्मॉग टॉवर क्या है और इनके लगाए जाने के बाद दिल्ली में क्या फर्क पड़ेगा ऐसे कई सवाल आपकी जेहन में उठ रहे होंगे. तो आइए अब हम आपको स्मॉग टॉवर के बारे में बता देते हैं कि ये क्या काम करता है.

  • 1 सेकंड में 1000 क्यूबिक मीटर हवा को साफ करेगा स्मॉग टावर
  • 25 मीटर की ऊंचाई वाले स्मॉग टावर में लगाए जाएंगे 40 फैन
  • 1 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में हवा को साफ करेगा.

हर साल राजधानी दिल्ली में अक्टूबर नवंबर की शुरुआत में धुंध बढ़ती है दरअसल ये धुंध नहीं बल्कि वायु प्रदूषण की वजह से इकट्ठा हुआ धुंआ होता है जो कि वातावरण में एकदम से छा जाता है इस बात को देखते हुए इस अक्टूबर और नवंबर महीने से पहले इस स्मॉग टॉवर को तैयार कर खड़ा कर दिया जाएगा. दिल्ली में बनने वाला स्मॉग टावर के लिए आईआईटी मुंबई और टाटा कंसल्टेंसी को दी गई है जिम्मेदारी. इस प्रयोग की सफलता पर निर्भर करेगा कि आगे क्या इस तरीके के टावर दिल्ली में और भी जगह लगाए जाएंगे या नहीं.

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने इस प्रोजेक्ट का जायजा लिया. दिल्ली के अंदर प्रदूषण के खिलाफ सीएम केजरीवाल के नेतृत्व में 10 सूत्रीय एक्शन प्लान पर काम हो रहा है. दिल्ली के अंदर पहली बार स्मॉग टॉवर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बनाया जा रहा है. अगर ये प्लान सफल होता है तो 20 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा है  25 मीटर ऊँचाई है, पर सेकंड एक हजार घन मीटर ये हवा को साफ करके छोड़ेगा. इस तरह का स्मॉग टॉवर चाइना में लगाया है, लेकिन टेक्नॉलोजी का फर्क है. अनुमान है कि इससे एक वर्ग मीटर तक इसका असर रहेगा. हवा में पीएम 2.5 और 10 को साफ किया जा सकता है. 15 अगस्त तक इसे तैयार  करके शुरू किया जाएगा.