होली 2026 पर 122 साल बाद चंद्रग्रहण और भद्रा का साया; जानें कब होगा होलिका दहन और कब खेली जाएगी रंगों की होली

पटना/भागलपुर | 01 मार्च, 2026: इस साल रंगों का महापर्व होली कुछ ऐसे खगोलीय और ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है, जो पिछले एक-डेढ़ दशक में नहीं देखे गए। करीब 122 साल बाद (पिछली बार 1904 में) ऐसा दुर्लभ योग बना है, जब होली के ठीक साथ चंद्रग्रहण पड़ रहा है। इस कारण होलिका दहन की तिथि और मुहूर्त को लेकर ज्योतिषियों के बीच दो मत बन गए हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ ने आपके लिए इस उलझन को सुलझाने के लिए सभी पक्षों का विश्लेषण किया है।

122 साल बाद ‘ग्रहण’ वाली होली: क्या है पूरा मामला?

​ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी। इसी बीच 3 मार्च को चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा, जो धार्मिक कार्यों में बाधा पैदा करता है।

  • पूर्णिमा तिथि: 2 मार्च (शाम 5:55 बजे) से 3 मार्च (शाम 5:07 बजे) तक।
  • चंद्रग्रहण का समय: 3 मार्च (दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक)।
  • सूतक काल: 3 मार्च सुबह 9:19 बजे से प्रभावी।

पक्ष 1: 3 मार्च को दहन क्यों है श्रेष्ठ?

​ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत और अमित गुप्ता जैसे विद्वानों का मानना है कि होलिका दहन 3 मार्च की शाम को ही होना चाहिए। इसके पीछे मुख्य तर्क ‘भद्रा’ और ‘ग्रहण मोक्ष’ है:

  • भद्रा का साया: 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से ही भद्रा लग जाएगी, जो 3 मार्च की सुबह 5:31 बजे तक रहेगी। शास्त्रों में भद्रा के समय होलिका दहन को बेहद अशुभ माना गया है।
  • ग्रहण के बाद शुद्धि: 3 मार्च की शाम 6:47 बजे जब ग्रहण समाप्त (मोक्ष) हो जाएगा, तब भद्रा का प्रभाव भी नहीं रहेगा। ऐसे में शुद्धिकरण के बाद होलिका दहन और पूजा-पाठ करना सबसे उत्तम और निर्दोष होगा।
  • पूजन का समय: महिलाएं 3 मार्च को सुबह 9:19 बजे (सूतक लगने से पहले) होलिका पूजन कर सकती हैं।

पक्ष 2: 2 मार्च को दहन के पीछे का तर्क

​दूसरी ओर, ज्योतिषाचार्य भारत ज्ञान भूषण और राहुल अग्रवाल का तर्क है कि होलिका दहन के लिए ‘प्रदोश काल’ (शाम का समय) में पूर्णिमा का होना अनिवार्य है।

  • प्रदोष काल: 2 मार्च की शाम को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि मिल रही है।
  • भद्रा से बचाव: इनके अनुसार, भद्रा के ‘मुख काल’ (जो रात 2:32 से शुरू होगा) को छोड़कर, भद्रा के ‘पुच्छ काल’ या उससे पहले दहन किया जा सकता है।
  • मुहूर्त: 2 मार्च की शाम 6:22 बजे से रात 8:53 बजे के बीच दहन को कुछ विद्वान उचित मान रहे हैं।

रंगों की होली (धुलेंडी) कब?

​तिथियों के इस फेरबदल के बावजूद, रंगों का उत्सव यानी धुलेंडी पूरे देश में 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। 3 मार्च को ग्रहण के कारण सूतक और शुद्धिकरण की प्रक्रिया चलेगी, जिसके बाद अगले दिन सुबह से अबीर-गुलाल उड़ेगा।

महत्वपूर्ण समय सारिणी (एक नज़र में)

  • होलिका पूजन (महिलाएं): 3 मार्च, सुबह 9:19 बजे से पहले।
  • चंद्रग्रहण (सूतक): 3 मार्च, सुबह 9:19 बजे से शाम 6:47 बजे तक।
  • होलिका दहन (शुद्ध मुहूर्त): 3 मार्च, शाम 6:47 बजे (ग्रहण समाप्ति के बाद)।
  • रंगोत्सव (होली): 4 मार्च, बुधवार।

VOB का नजरिया: आस्था और विज्ञान का मेल

​122 साल बाद बन रहा यह संयोग खगोल प्रेमियों के लिए जितना रोमांचक है, आम जनता के लिए उतना ही उलझन भरा। हालांकि विद्वानों के अलग-अलग मत हैं, लेकिन ‘ऋषि परंपरा’ के अनुसार ग्रहण काल में कोई भी शुभ कार्य टालना ही बेहतर माना जाता है। ऐसे में 3 मार्च की शाम ग्रहण मोक्ष के बाद दहन करना सबसे सुरक्षित विकल्प जान पड़ता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ आप सभी को सुरक्षित और खुशहाल होली की अग्रिम शुभकामनाएं देता है!

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

  • Related Posts

    सहरसा की 5 ‘लापता’ बेटियों का लखनऊ कनेक्शन: अश्बाग स्टेशन से सभी सुरक्षित बरामद; पुलिस की मुस्तैदी ने टाला बड़ा अनहोनी का साया

    Share Add as a preferred…

    Continue reading