सीतामढ़ी में प्रशासनिक हड़कंप: डुमरा सीओ डॉली कुमारी निलंबित; राजस्व संग्रह में लापरवाही और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोपों पर गिरी गाज

मुख्य बिंदु:

  • कार्रवाई: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा डुमरा अंचल अधिकारी (सीओ) डॉली कुमारी का तत्काल प्रभाव से निलंबन।
  • अनुशासनिक कोताही: मुख्यमंत्री की संभावित यात्रा के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में विफलता।
  • विभागीय कार्यक्रमों से दूरी: विभागीय मंत्री के ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ कार्यक्रम में शामिल न होने का आरोप।
  • निर्वाचन कार्यों में लापरवाही: मार्च 2026 में चलाए गए मतदाता जागरूकता अभियान के सरकारी निर्देशों की अनदेखी।
  • वित्तीय विफलता: राजस्व संग्रह के 288.38 लाख के लक्ष्य के मुकाबले महज 69.82 लाख रुपये (लगभग 24%) की वसूली।

​बिहार के प्रशासनिक महकमे में जवाबदेही और अनुशासन को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सीतामढ़ी जिले के डुमरा अंचल की अंचल अधिकारी (सीओ) डॉली कुमारी के खिलाफ बड़ी गाज गिरी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने डॉली कुमारी को उनके पद से निलंबित करते हुए मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। निलंबन की यह कार्रवाई केवल एक आधिकारिक आदेश नहीं है, बल्कि यह उन तमाम अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है जो विभागीय लक्ष्यों और सरकारी प्रोटोकॉल को हल्के में लेते हैं। डॉली कुमारी पर लगे आरोप प्रशासनिक शिथिलता से लेकर वित्तीय कुप्रबंधन तक फैले हुए हैं, जिसने जिले की विकास रैंकिंग और सरकारी साख को प्रभावित किया है।

वीवीआईपी मूवमेंट और प्रोटोकॉल में बड़ी चूक

​किसी भी जिले के लिए मुख्यमंत्री की यात्रा एक सर्वोच्च प्राथमिकता वाला कार्य होता है। डुमरा की अंचलाधिकारी के खिलाफ लगे आरोपों में सबसे गंभीर आरोप मुख्यमंत्री की संभावित यात्रा के दौरान की गई तैयारियों में कोताही बरतना है। प्रोटोकॉल के अनुसार, मुख्यमंत्री के आगमन से पूर्व अंचल स्तर पर भूमि, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं का खाका तैयार करना सीओ की जिम्मेदारी होती है। विभाग ने पाया कि डॉली कुमारी ने इन महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को लेकर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।

​इसके साथ ही, विभागीय मंत्री द्वारा आयोजित ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति ने आग में घी डालने का काम किया। यह कार्यक्रम सीधे तौर पर जनता की समस्याओं को सुनने और भूमि सुधार की दिशा में सरकार के विजन को धरातल पर उतारने के लिए तैयार किया गया था। एक अंचल अधिकारी का अपने ही विभागीय मंत्री के महत्वपूर्ण कार्यक्रम से नदारद रहना न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह विभाग की कार्यसंस्कृति पर भी सवाल उठाता है।

राजस्व संग्रह: लक्ष्यों से कोसों दूर रही परफॉर्मेंस

​किसी भी अंचल अधिकारी की कार्यक्षमता का सबसे बड़ा मापदंड राजस्व संग्रह (Revenue Collection) होता है। डुमरा अंचल के लिए वित्तीय वर्ष में राजस्व संग्रह का लक्ष्य 288.38 लाख रुपये निर्धारित किया गया था। यह राशि राज्य के विकास कार्यों और स्थानीय निकायों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, समीक्षा के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। डॉली कुमारी के नेतृत्व में डुमरा अंचल ने केवल 69.82 लाख रुपये की वसूली की।

​लक्ष्य के मुकाबले महज 24 प्रतिशत की उपलब्धि यह दर्शाती है कि राजस्व वसूली की प्रक्रिया में या तो घोर लापरवाही बरती गई या फिर संसाधनों का उचित प्रबंधन नहीं किया गया। वित्तीय कुप्रबंधन के इस मामले को विभाग ने अत्यंत गंभीरता से लिया है, क्योंकि राजस्व में इतनी बड़ी गिरावट सीधे तौर पर जिले के वित्तीय ढांचे को कमजोर करती है।

मतदाता जागरूकता अभियान की अनदेखी

​लोकतंत्र के महापर्व और चुनावी तैयारियों के बीच मतदाता जागरूकता अभियान (SVEEP) एक अनिवार्य सरकारी निर्देश होता है। मार्च 2026 में जब पूरे राज्य में मतदाताओं को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा था, तब डुमरा अंचल में विभागीय निर्देशों का पालन नहीं किया गया। एक राजपत्रित अधिकारी के स्तर पर निर्वाचन संबंधी कार्यों या जागरूकता अभियानों में शिथिलता को प्रशासनिक दृष्टि से अक्षम्य माना जाता है। निर्वाचन विभाग और राजस्व विभाग के बीच समन्वय की इस कमी को भी निलंबन के आधार के रूप में शामिल किया गया है।

प्रशासनिक संदेश: लापरवाही की कोई जगह नहीं

​डॉली कुमारी का निलंबन इस बात की तस्दीक करता है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। विभाग के अपर मुख्य सचिव और मंत्री के स्तर पर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जो अधिकारी जमीन से जुड़े मुद्दों, जनता के संवाद कार्यक्रमों और वित्तीय लक्ष्यों में पीछे रहेंगे, उन पर गाज गिरना तय है।

​डुमरा जैसे महत्वपूर्ण अंचल में इस तरह की प्रशासनिक शून्यता ने स्थानीय जनता के कामों को भी प्रभावित किया था। दाखिल-खारिज (Mutation), भूमि मापी और प्रमाण पत्रों के निर्गत होने की गति पर भी इस अनुशासनहीनता का प्रभाव देखा जा रहा था। डॉली कुमारी के निलंबन के बाद अब डुमरा अंचल में नए अधिकारी की तैनाती और लंबित कार्यों के निष्पादन की चुनौती प्रशासन के सामने होगी।

सुशासन और जवाबदेही की कसौटी

​सीतामढ़ी में हुई यह कार्रवाई अन्य अंचलाधिकारियों के लिए एक ‘केस स्टडी’ की तरह है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने यह संदेश दे दिया है कि केवल पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिणामों के प्रति उत्तरदायी होना भी अनिवार्य है। वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति में विफलता और वीवीआईपी प्रोटोकॉल की अनदेखी ने डॉली कुमारी के प्रशासनिक करिअर पर एक बड़ा दाग लगा दिया है।

​अब विभागीय जांच के जरिए इन आरोपों की गहराई से पड़ताल की जाएगी। फिलहाल, डॉली कुमारी को निलंबित कर विभागीय जांच का सामना करने के निर्देश दिए गए हैं।

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