पटना, 19 जुलाई 2025: बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) कुंदन कृष्णन इन दिनों अपने एक विवादित बयान को लेकर राजनीतिक घमासान में फंस गए हैं। किसानों को आपराधिक घटनाओं में अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराने वाले उनके वक्तव्य ने तीखी प्रतिक्रियाएं बटोरी हैं। विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ दलों के नेता भी इस बयान की आलोचना कर रहे हैं, हालांकि कुछ नेताओं ने उनका बचाव भी किया है।
क्या कहा था एडीजी ने?
हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एडीजी कुंदन कृष्णन ने कहा था कि,
“अप्रैल, मई और जून के महीने में हत्याओं की संख्या बढ़ जाती है। इस दौरान अधिकतर किसानों को कोई काम नहीं रहता है। बारिश के बाद जब कृषक समाज व्यस्त हो जाता है तो घटनाएं घटती हैं।”
इस बयान का आशय यह निकाला गया कि खाली समय में किसान अपराध में संलिप्त हो जाते हैं, जिससे हत्या जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं।
चिराग पासवान का तीखा हमला
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने एडीजी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा:
“एडीजी इस प्रकार की बात कतई नहीं कह सकते हैं कि बरसात से पहले घटनाएं होती हैं क्योंकि किसान फ्री होते हैं। आप अन्नदाता पर इस प्रकार का आरोप नहीं लगा सकते। राज्य सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि जनता में सुरक्षा का भाव बना रहे।”
चिराग ने यह भी कहा कि जब राजधानी के बड़े अस्पताल में घुसकर हत्या की जा रही है, तो प्रशासन को जिम्मेदारी लेनी होगी।
तेजस्वी यादव भी बोले थे तीखे शब्द
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी एडीजी के बयान पर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने इसे किसानों के अपमान के रूप में देखा और राज्य सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की थी।
मांझी ने किया बचाव
विवाद के बीच हम पार्टी के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने एडीजी का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा:
“कोई कितनी भी आलोचना करे, लेकिन कुंदन कृष्णन ने बिहार में जंगलराज खत्म कर सुशासन लाने में अहम भूमिका निभाई है। हमें उन पर गर्व है।”
माफी मांगते नजर आए एडीजी
विवाद बढ़ने पर एडीजी कुंदन कृष्णन ने सफाई दी और क्षमा भी मांगी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया।
“अगर मेरे वक्तव्य से किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं। मेरे पूर्वज भी किसान रहे हैं, कृषक समाज से मेरा गहरा जुड़ाव है।”
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा
यह मामला अब बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। सोशल मीडिया से लेकर जनसभाओं तक किसानों के सम्मान और पुलिस की संवेदनशीलता पर बहस तेज हो गई है।
किसानों के प्रति सम्मान भारतीय समाज की मूल भावना रही है। प्रशासनिक अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बयानों में विशेष सावधानी बरतें, जिससे समाज के किसी वर्ग की गरिमा को ठेस न पहुंचे।


