भागलपुर-बेंगलुरु के यात्रियों की ‘लॉटरी’ लग गई! सप्ताह में 3 दिन दौड़ सकती है ‘अंग एक्सप्रेस’; DRM ने हेडक्वार्टर को भेजा बड़ा प्रस्ताव

HIGHLIGHTS: सिल्क सिटी के मुसाफिरों को ‘वेटिंग’ और ‘भीड़’ से मिलेगी आजादी; मालदा रेल मंडल का बड़ा एक्शन

  • बड़ी पहल: मालदा रेल मंडल के DRM मनीष कुमार गुप्ता ने ‘अंग एक्सप्रेस’ के फेरे (Frequency) बढ़ाने के लिए रेलवे मुख्यालय को लिखा पत्र।
  • प्रस्ताव: सप्ताह में सिर्फ 1 दिन (बुधवार) की जगह अब 2 से 3 दिन चलाने की जोरदार मांग।
  • ग्राउंड जीरो का दर्द: जनरल बोगी में एक इंच जगह के लिए सुबह 5:30 बजे से ही कतार में लग रहे हैं भागलपुर, बांका और पूर्णिया के यात्री।
  • मजबूरी का सफर: हर हफ्ते 200 से अधिक यात्रियों की छूट रही है ट्रेन; ₹1200 की रसीद कटाकर स्लीपर में ‘खड़ा’ होकर सफर करने को विवश हैं लोग।
  • VOB इनसाइट: बेंगलुरु जाने वाले ‘सिल्क सिटी’ के प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है यह खबर।

भागलपुर | 23 मार्च, 2026

​भागलपुर से सुदूर दक्षिण (बेंगलुरु) जाने वाले हजारों यात्रियों के लिए सोमवार की सुबह एक बड़ी उम्मीद लेकर आई है। मालदा रेल मंडल ने अंग प्रदेश के लोगों की बरसों पुरानी पीड़ा को समझते हुए अंग एक्सप्रेस (Anga Express) के फेरे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता ने रेलवे हेडक्वार्टर को पत्र लिखकर इस ट्रेन को सप्ताह में कम से कम तीन दिन चलाने का प्रस्ताव दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की पड़ताल के अनुसार, अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो भागलपुर रेलवे स्टेशन पर हर बुधवार को होने वाली ‘महा-अफरातफरी’ से लोगों को निजात मिल जाएगी।

5:30 AM से ‘जंग’ और 200 लोगों का ‘सपना’ टूटना: कड़वी हकीकत

​वर्तमान में अंग एक्सप्रेस सप्ताह में केवल एक दिन (बुधवार) को दोपहर 1:55 बजे भागलपुर से खुलती है। लेकिन इस एक दिन की कहानी किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है।

  • भीड़ का भूगोल: भागलपुर के अलावा बांका, पूर्णिया, मुंगेर और बड़हरवा जैसे इलाकों से यात्री भारी बोझ लेकर सुबह 5:30 बजे ही स्टेशन पहुँच जाते हैं ताकि जनरल बोगी में घुसने का मौका मिल सके।
  • छूटती ट्रेनें: भारी भीड़ के कारण हर हफ्ते करीब 200 से ज्यादा यात्री प्लेटफॉर्म पर ही रह जाते हैं और उनकी ट्रेन निकल जाती है।
  • महंगा ‘खड़ा’ सफर: ट्रेन पकड़ने की जद्दोजहद में नाकाम रहने वाले यात्री अंततः टीटीई (TTE) से ₹1200 की रसीद कटवाते हैं और पूरे 2500 किलोमीटर का सफर स्लीपर कोच में ‘खड़े’ होकर तय करते हैं।

VOB डेटा चार्ट: अंग एक्सप्रेस की ‘मौजूदा’ स्थिति और ‘प्रस्तावित’ बदलाव

  • वर्तमान फेरे: सप्ताह में केवल 1 दिन (बुधवार)।
  • प्रस्तावित फेरे: सप्ताह में 2 से 3 दिन।
  • मौजूदा समय: दोपहर 1:55 बजे (भागलपुर से प्रस्थान)।
  • प्रभावित क्षेत्र: भागलपुर, बांका, पूर्णिया, मुंगेर, बड़हरवा और साहिबगंज।
  • मुख्य मांग: दक्षिण भारत जाने वाले ‘श्रमिक’ और ‘आईटी प्रोफेशनल्स’ के लिए अतिरिक्त रैक की उपलब्धता।
  • प्रशासनिक कदम: मालदा डीआरएम द्वारा रेलवे बोर्ड/मुख्यालय को आधिकारिक अनुशंसा।

VOB का नजरिया: क्या ‘फेरे’ बढ़ाना ही एकमात्र समाधान है?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि भागलपुर स्टेशन की बढ़ती अहमियत को देखते हुए यह कदम बहुत पहले उठा लिया जाना चाहिए था।

  1. दक्षिण भारत की बढ़ती मांग: भागलपुर से बेंगलुरु जाने वालों में केवल मजदूर ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में छात्र और आईटी सेक्टर के युवा भी शामिल हैं। एक दिन की फ्रीक्वेंसी इनके लिए ‘ऊंट के मुँह में जीरा’ जैसी है।
  2. राजस्व का लाभ: रेलवे को पता है कि इस रूट पर ‘डिमांड’ बहुत ज्यादा है। फेरे बढ़ने से रेलवे के राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी और कालाबाजारी (जैसे स्लीपर में खड़े होकर जाने की मजबूरी) पर रोक लगेगी।
  3. अन्य ट्रेनों पर दबाव: अगर अंग एक्सप्रेस तीन दिन चलती है, तो मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर और अन्य कनेक्टिंग ट्रेनों पर पड़ने वाला ‘लोड’ भी कम होगा।

निष्कर्ष: हेडक्वार्टर के ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार

​डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता का पत्र अब रेलवे मुख्यालय की मेज पर है। भागलपुर के लोगों को उम्मीद है कि 114वें बिहार दिवस के उपलक्ष्य में रेलवे बोर्ड इस मांग पर मुहर लगाकर क्षेत्रवासियों को बड़ा तोहफा देगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस मामले की हर अपडेट और नए टाइम-टेबल की जानकारी आप तक सबसे पहले पहुँचाएगा।

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