- पिता की गुहार: विजयनगर चौक से 30 जनवरी को लापता हुई थी महिला और मासूम बच्ची; 15 दिन बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली
- पुलिस की कार्यशैली पर सवाल: 31 जनवरी को दिया आवेदन, लेकिन FIR दर्ज करने में लगाए 5 दिन; पीड़ित परिवार का आरोप- SP के कहने पर केस तो लिखा, पर जांच के नाम पर मिल रहा सिर्फ आश्वासन
- बच्ची की जान की फिक्र: पिता विकास मिश्रा का दर्द- “ढाई साल की बेटी का सवाल है, पुलिस अब तक आरोपी का कॉल डिटेल (CDR) तक नहीं निकाल पाई है”
द वॉयस ऑफ बिहार (बांका डेस्क)
बिहार पुलिस अपराध नियंत्रण के लाख दावे कर ले, लेकिन बांका (Banka) से आई एक तस्वीर सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है। शहर के विजयनगर चौक (वार्ड नं 23) से एक महिला और उसकी ढाई साल की मासूम बच्ची पिछले 15 दिनों से लापता है। परिवार अनहोनी की आशंका से डरा हुआ है, लेकिन बांका टाउन थाना पुलिस कछुआ चाल से चल रही है। हद तो तब हो गई जब पीड़ित परिवार को FIR दर्ज कराने के लिए एसपी (SP) की चौखट पर जाना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
बांका के विजयनगर चौक, प्रेस बाजार के पीछे रहने वाले विकास मिश्रा की पत्नी लक्ष्मी कुमारी (उम्र करीब 20 वर्ष) अपनी ढाई साल की बेटी शिवानी को लेकर 30 जनवरी 2026 की दोपहर 12:30 बजे घर से निकली और वापस नहीं लौटी।
पीड़ित विकास मिश्रा की मां रूपा देवी ने 31 जनवरी को ही बांका टाउन थाने में लिखित आवेदन दिया था। उन्होंने एक मोबाइल नंबर (7361027350) का जिक्र करते हुए आशंका जताई थी कि इसी नंबर धारक के बहकावे में आकर उनकी बहू और पोती को अगवा किया गया है।
SP के हस्तक्षेप के बाद जागी पुलिस
आरोप है कि थाने ने पहले मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जब पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक (SP) से गुहार लगाई, तब जाकर घटना के 5 दिन बाद यानी 5 फरवरी 2026 को FIR (कांड संख्या 72/26) दर्ज की गई। इस मामले में BNS की धारा 137(2) और 140(3) के तहत केस दर्ज किया गया है।
“मेरी बेटी को ढूंढ दो साहब”
लापता बच्ची के पिता विकास मिश्रा ने ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ को बताया, “आज घटना को 14-15 दिन हो गए हैं। पुलिस ने कहा था कि CDR (Call Detail Record) निकालेंगे, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। हम रोज थाने जाते हैं और आश्वासन लेकर लौट आते हैं। मेरी ढाई साल की बेटी किस हाल में होगी, यह सोचकर रूह कांप जाती है।”
सवाल यह है कि जब पीड़ित परिवार ने संदिग्ध मोबाइल नंबर उपलब्ध करा दिया है, तो पुलिस को लोकेशन ट्रेस करने या CDR निकालने में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है?


