HIGHLIGHTS: जीवन जागृति सोसाइटी और IMA की बड़ी मुहिम; टीबी उन्मूलन के लिए ‘जागरूकता मुहर’ और विशेष पंपलेट का फॉर्मूला
- नया प्रयोग: टीबी मरीजों के मेडिकल पर्चों (चिट्ठों) पर अब “मास्क पहनें, जब सफर में या भीड़ में हों” की मुहर लगाने का सुझाव।
- प्रतिनिधिमंडल: डॉ. अजय सिंह ने क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य सेवा डॉ. अजय कुमार सिंह से मिलकर सौंपी विशेष मुहर।
- इन्फेक्शन कंट्रोल: टीबी एक संक्रामक बीमारी है; मास्क के बढ़ते प्रयोग से संक्रमण की चेन तोड़ने की तैयारी।
- शिक्षा कवच: मरीजों को खान-पान, लक्षण और सुधार न होने पर चेतावनी संकेतों वाले विस्तृत पंपलेट देने की मांग।
- VOB इनसाइट: भागलपुर से उठी यह छोटी सी पहल अगर सरकारी स्तर पर लागू हुई, तो टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को मिलेगी नई रफ्तार।
भागलपुर | 25 मार्च, 2026
विश्व टीबी दिवस के अवसर पर ‘सिल्क सिटी’ भागलपुर ने स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूँज अब पटना और दिल्ली के गलियारों तक पहुँचने की उम्मीद है। जीवन जागृति सोसाइटी ने आईएमए (IMA) भागलपुर के साथ मिलकर टीबी उन्मूलन के लिए एक ‘अनूठा मॉडल’ तैयार किया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल इलाज नहीं, बल्कि समाज के व्यवहार में बदलाव लाकर टीबी के संक्रमण को जड़ से खत्म करना है।
डॉक्टर की पर्ची बनेगी ‘जागरूकता का हथियार’
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह ने अपनी टीम के साथ क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य सेवा डॉ. अजय कुमार सिंह से मुलाकात की और उन्हें एक विशेष ‘जागरूकता मुहर’ (Awareness Stamp) प्रदान की। इस मुहर की खासियत यह है कि इसे किसी भी मरीज के पर्चे पर लगाया जा सकता है, जिससे मरीज और उसके आसपास के लोग यह समझ सकें कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना कितना अनिवार्य है।
डॉ. अजय सिंह ने इस पहल के पीछे का तर्क देते हुए बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से खांसने और छींकने से फैलती है। अक्सर टीबी के मरीज सार्वजनिक वाहनों या भीड़ में बिना किसी सुरक्षा के घूमते हैं, जिससे संक्रमण फैलता है। पर्चे पर लगी यह मुहर उन्हें अपनी और दूसरों की सुरक्षा के प्रति निरंतर सचेत करती रहेगी।

VOB डेटा चार्ट: टीबी उन्मूलन का ‘भागलपुर मॉडल’
- प्रस्तावक संस्था: जीवन जागृति सोसाइटी एवं IMA भागलपुर।
- मुख्य संदेश: “मास्क पहनें, जब सफर में या भीड़ में हों” (विशेष मुहर के जरिए)।
- लक्ष्य: टीबी संक्रमण की श्रृंखला (Chain of Infection) को तोड़ना।
- पंपलेट का एजेंडा: लक्षण, बचाव, खान-पान और ‘चेतावनी संकेत’ (Warning Signs)।
- प्रमुख व्यक्तित्व: डॉ. अजय सिंह (राष्ट्रीय अध्यक्ष) और डॉ. अजय कुमार सिंह (अपर निदेशक, स्वास्थ्य सेवा)।
पंपलेट: टीबी मरीज के लिए ‘सर्वाइवल गाइड’
जागरूकता मुहर के अलावा, डॉ. अजय सिंह ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने मांग की है कि प्रत्येक टीबी मरीज को एक विस्तृत पंपलेट दिया जाना चाहिए। इस पंपलेट में सरल भाषा में निम्नलिखित जानकारियां होनी चाहिए:
- संक्रमण से बचाव: परिवार के अन्य सदस्यों को बीमारी की चपेट में आने से कैसे बचाएं।
- खान-पान (Diet): टीबी के इलाज के दौरान प्रोटीन युक्त आहार का महत्व।
- लक्षण और सुधार: यदि दवा खाने के बावजूद मरीज की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, तो वे कौन से संकेत हैं जिन्हें तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए।
- नियमितता: दवा का कोर्स बीच में न छोड़ने के गंभीर परिणामों के बारे में जानकारी।
VOB का नजरिया: क्या ‘मुहर’ बदलेगी टीबी का भविष्य?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि भागलपुर की यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में ‘कम लागत, उच्च प्रभाव’ (Low Cost, High Impact) का बेहतरीन उदाहरण है।
- व्यवहारगत बदलाव: अक्सर भारी-भरकम विज्ञापनों से वो असर नहीं होता, जो एक डॉक्टर के पर्चे पर लगी छोटी सी मुहर कर सकती है। यह सीधे तौर पर मरीज के दिमाग पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालती है।
- सरकारी सहयोग की जरूरत: क्षेत्रीय अपर निदेशक ने इस सुझाव को सकारात्मक रूप से लिया है। अगर स्वास्थ्य विभाग इसे अनिवार्य बना देता है, तो टीबी के खिलाफ लड़ाई में भागलपुर देश को एक नई दिशा दिखाएगा।
- सामाजिक जिम्मेदारी: मास्क पहनना केवल कोविड तक सीमित नहीं रहना चाहिए। श्वसन संबंधी हर बीमारी में यह एक ढाल की तरह काम करता है।
निष्कर्ष: सुशासन और स्वस्थ समाज का संकल्प
जीवन जागृति सोसाइटी और स्वास्थ्य विभाग का यह तालमेल भागलपुर के लिए गर्व की बात है। डॉ. अजय कुमार सिंह (शिशु रोग विशेषज्ञ) और उनकी टीम ने इस पहल को सरकार तक पहुँचाने का भरोसा दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ उम्मीद करता है कि ऐसी ही छोटी-छोटी पहलें मिलकर ‘टीबी मुक्त भागलपुर’ और ‘टीबी मुक्त भारत’ के सपने को सच करेंगी।


