पटना | 25 फरवरी, 2026: बिहार के गन्ना किसानों की किस्मत अब ‘टिशू कल्चर’ और ‘सॉइल टेस्टिंग’ जैसी आधुनिक तकनीकों से चमकने वाली है। राज्य सरकार के गन्ना उद्योग विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य की सभी कार्यरत चीनी मिलों में टिशू कल्चर प्रयोगशाला, मिट्टी जांच केंद्र और बॉयो कंट्रोल प्रयोगशाला स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब चीनी मिलें केवल गन्ना पेराई का केंद्र नहीं, बल्कि किसानों के लिए ‘एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर’ के रूप में काम करेंगी।
चीनी मिलों को विभाग का ‘अल्टीमेटम’: जल्द भेजें प्रस्ताव
गन्ना उद्योग विभाग ने इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए कमर कस ली है। विभाग ने राज्य की सभी चालू चीनी मिलों के महाप्रबंधकों को निर्देश दिया है कि वे इन प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए शीघ्र प्रस्ताव उपलब्ध कराएं। इसके लिए विभाग ने एक समय सीमा (डेडलाइन) भी निर्धारित की है, ताकि आगामी सीजन से पहले सुविधाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाए।
क्यों खास है यह ‘टिशू कल्चर’ लैब?
गन्ने की खेती में सबसे बड़ी समस्या उन्नत बीजों की कमी और पुरानी किस्मों का बार-बार इस्तेमाल है। नई लैब से ये फायदे होंगे:
- उन्नत बीजों का विस्तार: लैब के जरिए गन्ने के नाभिकीय बीज (Nuclear seed), प्रजनन बीज (Breeder seed) और आधार बीज (Foundation seed) का बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा।
- बीमारी मुक्त पौधे: टिशू कल्चर तकनीक से तैयार पौधे पूरी तरह स्वस्थ और बीमारी मुक्त होंगे, जिससे पैदावार में भारी बढ़ोतरी होगी।
- कम समय में ज्यादा उत्पादन: किसानों को कम समय में गन्ने की नई और हाइब्रिड किस्में उपलब्ध हो सकेंगी।
खेत की ‘सेहत’ बताएगा मिट्टी जांच केंद्र
अक्सर किसान जानकारी के अभाव में खेतों में जरूरत से ज्यादा या गलत उर्वरक (Fertilizer) डाल देते हैं, जिससे लागत बढ़ती है और जमीन खराब होती है।
- मिट्टी की जांच: अब चीनी मिल परिसर में ही किसान अपनी मिट्टी की जांच करा सकेंगे।
- उर्वरक का सटीक उपयोग: जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान जान पाएंगे कि उनके खेत को किस खाद की कितनी जरूरत है।
- फसल चक्र: लैब विशेषज्ञों की मदद से किसानों को वैज्ञानिक तरीके से फसल चक्र (Crop Cycle) बनाने में मदद मिलेगी।
इन जिलों में सबसे पहले शुरू होगी प्रक्रिया
ईख आयुक्त ने राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों के सहायक निदेशकों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें प्रमुख जिले शामिल हैं:
- चंपारण बेल्ट: बगहा, बेतिया, मोतिहारी।
- गोपालगंज-सीवान: गन्ना उत्पादन का प्रमुख केंद्र।
- सीतामढ़ी एवं समस्तीपुर: उत्तर बिहार की चीनी मिलें।
इन जिलों के सहायक निदेशक सीधे मिल प्रबंधकों से संपर्क कर जमीन और संसाधनों का ब्यौरा विभाग को सौंपेंगे।
VOB का नजरिया: आत्मनिर्भर किसान, मिठास भरा बिहार
बिहार की चीनी मिलों का आधुनिकीकरण वक्त की जरूरत है। अक्सर किसान अच्छे बीजों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहते हैं। अगर चीनी मिलों में ही टिशू कल्चर लैब और बायो-कंट्रोल (कीट नियंत्रण) की सुविधा मिल जाती है, तो बिहार का गन्ना उत्पादन उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के रिकॉर्ड को चुनौती दे सकता है। यह कदम न केवल चीनी के उत्पादन को बढ़ाएगा, बल्कि किसानों की लागत घटाकर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


