PMAY-G में पारदर्शिता की मिसाल: बिहार के लाखों परिवारों को मिला पक्का घर, लोकसभा में केंद्र सरकार का जवाब

प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) के तहत लाभार्थियों की पहचान, चयन और आवास आवंटन को लेकर लोकसभा में पूछे गए प्रश्न संख्या 1388 के जवाब में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने विस्तृत जानकारी साझा की। मंत्री ने बताया कि योजना का पूरा तंत्र तकनीक-आधारित, पारदर्शी और बहु-स्तरीय सत्यापन पर आधारित है, जिससे लाभ केवल उन्हीं परिवारों तक पहुँचे जिन्हें वास्तव में घर की आवश्यकता है।

SECC–2011 से लेकर ग्राम सभा सत्यापन तक बहु-स्तरीय जांच

मंत्री ने बताया कि PMAY-G के लाभार्थियों की सूची SECC-2011 डेटा से तैयार की गई थी, लेकिन अंतिम चयन से पहले—

  • ग्राम सभा सत्यापन,
  • अपील प्रक्रिया,
  • डुप्लीकेसी जांच,

जैसे चरणों से गुजरकर ही लाभार्थी फाइनल किए जाते हैं। इससे पारदर्शिता और पात्रता सुनिश्चित होती है।

आवास+ सर्वे में बिहार के लाखों परिवार शामिल

SECC-2011 में कई कमजोर परिवार शामिल नहीं हो पाए थे। इसे ध्यान में रखते हुए वर्ष 2018 में आवास+ सर्वेक्षण संचालित किया गया।

  • पंजीकरण हुए: 25.36 लाख परिवार
  • ग्राम सभा सत्यापन के बाद पात्र: 22.22 लाख परिवार

बिहार में अब तक का आवास आवंटन

केंद्र सरकार ने बताया कि बिहार PMAY-G के कार्यान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।

  • SECC-2011 सूची से आवंटन: 26,99,534 आवास
  • आवास+ सूची से आवंटन: 23,13,218 आवास
  • कुल पूर्ण निर्माण: 39,31,606 आवास

यह उपलब्धि बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में आवासहीनों को बड़े पैमाने पर राहत प्रदान करती है।

योजना बढ़ाई गई, 2 करोड़ नए ग्रामीण आवासों का लक्ष्य

सरकार ने PMAY-G को वर्ष 2028–29 तक बढ़ा दिया है। अब देशभर में 2 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण आवासों का निर्माण किया जाएगा।

इसके लिए नया व्यापक सर्वे भी कराया जा रहा है, ताकि वास्तविक गरीब परिवारों को चिन्हित कर लाभ पहुंचाया जा सके।

सांसद अजय कुमार मंडल ने केंद्र सरकार की पारदर्शी प्रक्रिया की सराहना की

माननीय सांसद अजय कुमार मंडल ने कहा कि PMAY-G की पारदर्शी एवं तकनीक-आधारित प्रक्रिया के कारण—

  • बिहार
  • और विशेष रूप से उनके संसदीय क्षेत्र

के लाखों गरीब परिवारों को पक्का घर मिलने का सीधा लाभ मिला है।


 

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