HIGHLIGHTS: ‘जल महोत्सव’ में सम्मानित हुईं बेटियां; ऑफिस से लेकर ‘पंप हाउस’ तक महिलाओं का जलवा
- सम्मान समारोह: विभागीय कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए PHED मुख्यालय में 23 महिला पदाधिकारियों और कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर नवाजा गया।
- स्पेशल रिकग्निशन: राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी खिलाड़ी और विभागीय कर्मी संतोषी कुमारी को खेल रत्न के रूप में विशेष सम्मान।
- बड़ा आंकड़ा: राज्य की 1.20 लाख जलापूर्ति योजनाओं के संचालन में करीब 50% हिस्सेदारी महिलाओं की; पंप चालक के रूप में निभा रही हैं अहम भूमिका।
- जल महोत्सव: 8 मार्च से 22 मार्च 2026 तक पूरे बिहार में मनाया जा रहा है ‘सशक्त समाज’ का उत्सव।
पटना | 21 मार्च, 2026
बिहार के गांवों में ‘हर घर नल का जल’ पहुँचाने का सपना आज जिन कंधों पर टिका है, उनमें आधी आबादी की ताकत सबसे ज्यादा है। शुक्रवार को पटना स्थित पीएचईडी (PHED) मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री संजय कुमार सिंह ने विभाग की 23 महिला अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया। यह केवल एक पुरस्कार समारोह नहीं था, बल्कि उन महिलाओं की जीत थी जिन्होंने तकनीकी और फील्ड वर्क के ‘पुरुष प्रधान’ समझे जाने वाले क्षेत्र में अपनी धाक जमाई है।
मैदान से दफ्तर तक: संतोषी कुमारी से लेकर पूजा कुमारी तक का सम्मान
मंत्री ने स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए विभाग की ‘नारी शक्ति’ की जमकर सराहना की:
- खिलाड़ी का सम्मान: संतोषी कुमारी (राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी) को उनकी खेल प्रतिभा के लिए विशेष रूप से सराहा गया।
- अधिकारी वर्ग: ओएसडी पूजा कुमारी, अवर सचिव सुनीता कुमारी, स्वाति सजल और कार्यपालक अभियंता प्रियम्वदा सहित कई इंजीनियरों को उनकी कर्तव्यनिष्ठा के लिए सम्मानित किया गया।
- नीतीश मॉडल का असर: मंत्री ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नौकरियों में दिए गए 35% आरक्षण का ही नतीजा है कि आज विभाग के हर स्तर पर महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं।
पंप चालक के रूप में ‘आधी आबादी’ का दबदबा
मंत्री संजय सिंह ने एक चौंकाने वाला और सुखद आंकड़ा साझा किया:
- 1.20 लाख योजनाएं: बिहार में चल रही सवा लाख के करीब जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव में महिलाएं पुरुषों के समकक्ष खड़ी हैं।
- अनुपालक की भूमिका: नियुक्त पंप चालकों और अनुरक्षकों में लगभग आधी संख्या महिलाओं की है, जो ग्रामीण स्तर पर सीधे व्यवस्था संभाल रही हैं।
VOB का नजरिया: क्या ‘पाइप और वॉल्व’ संभालती महिलाएं बदल रही हैं बिहार?
PHED विभाग की यह पहल ‘टोकन सम्मान’ से कहीं ज्यादा बड़ी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि जब एक महिला पंप ऑपरेटर बनती है, तो वह केवल पानी की सप्लाई शुरू नहीं करती, बल्कि गांव की रूढ़ियों को भी तोड़ती है।
’हर घर नल का जल’ योजना की सबसे बड़ी चुनौती ‘अनुरक्षण’ (Maintenance) है, और इसमें महिलाओं की 50% भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि योजना में जवाबदेही और ईमानदारी बनी रहे। हालांकि, विभाग को यह भी देखना होगा कि क्या इन महिला पंप चालकों को समय पर मानदेय मिल रहा है? सम्मान के साथ-साथ आर्थिक मजबूती ही ‘नारी सशक्तिकरण’ के इस बिहार मॉडल को देश में नंबर-1 बनाएगी। 18 मार्च को बापू टावर में महिला पंप चालकों का सम्मान और आज मुख्यालय में अधिकारियों का सम्मान, सुशासन की एक बेहतरीन कड़ी है।


