HIGHLIGHTS:
- बड़ी कार्रवाई: जीरो माईल चौक स्थित दो नामचीन मिठाई दुकानों पर जिला स्तरीय टीम की रेड।
- रेस्क्यू: हिटलर, दिलवर और गोलू नाम के 3 बच्चे बाल श्रम के दलदल से निकाले गए।
- संदेश: श्रम विभाग की चेतावनी— “बाल श्रम अपराध है, जेल की हवा खानी पड़ सकती है।”
मिठाई की दुकानों पर ‘कड़वा’ सच: बचपन से काम करा रहे थे मालिक
भागलपुर/नवगछिया: जिले में बाल श्रम के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बुधवार को नवगछिया में बड़ी कार्रवाई की गई। जिला स्तरीय गठित ‘धावादल’ ने नवगछिया प्रखंड के जीरो माईल चौक पर स्थित दो प्रतिष्ठित मिष्ठान भंडारों पर अचानक छापेमारी की। इस दौरान कड़ाही और बर्तनों के बीच अपना बचपन झोंक रहे तीन मासूमों को मुक्त कराया गया। पुलिस की मौजूदगी और अचानक हुई इस रेड से इलाके के अन्य दुकानदार भी अपनी दुकानें बंद कर खिसकते नजर आए।
[विमुक्त किए गए बाल श्रमिकों का विवरण]
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दुकान का नाम |
मुक्त कराए गए बच्चे |
स्थान |
|---|---|---|
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बाबा विश्वनाथ मिष्ठान भंडार |
हिटलर कुमार एवं दिलवर कुमार (02) |
जीरो माईल चौक, नवगछिया |
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जगदम्बा मिष्ठान |
गोलू कुमार (01) |
जीरो माईल चौक, नवगछिया |
इन तीनों बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद बाल कल्याण समिति (CWC), भागलपुर को सुपुर्द कर दिया गया है, जहाँ उनकी काउंसिलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
लेडी ऑफिसर के नेतृत्व में ‘धावादल’ का प्रहार
इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व नवगछिया की श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (LEO) श्रीमती अनिता कुमारी ने किया। टीम में जिले के विभिन्न प्रखंडों के तेज-तर्रार अधिकारियों को शामिल किया गया था:
- राजेश कुमार सिन्हा (LEO, रंगरा चौक)
- परितोष कुमार सिंह (LEO, खरीक)
- प्रभाशीष (LEO, नारायणपुर)
- मनोहर कुमार (LEO, बिहपुर)
- पुलिस बल: नवगछिया थाना की टीम
कानूनी चेतावनी: “दुकानदार संभल जाएं”
छापेमारी के बाद धावादल के सदस्यों ने स्थानीय दुकानदारों और लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना एक संज्ञेय अपराध है। पकड़े जाने पर न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि दुकान मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें जेल भी भेजा जा सकता है।
VOB का नजरिया: क्या ‘हिटलर’ और ‘गोलू’ को अब स्कूल नसीब होगा?
नवगछिया की सड़कों पर अक्सर इन बच्चों को होटलों में काम करते देखा जाता है। प्रशासन की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह केवल एक दिन का ‘छापा’ बनकर रह जाएगा? जिन बच्चों को आज मुक्त कराया गया है, उनकी शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी CWC को गंभीरता से लेनी होगी। साथ ही, उन दुकानदारों पर कड़ा जुर्माना जरूरी है जो चंद रुपयों की खातिर बच्चों का भविष्य कड़ाही में तल रहे हैं।


