HIGHLIGHTS:
- बड़ी सेंध: भवानीपुर थाने में तैनात रसोइए ने हवलदार के बैग से चोरी कीं 2 मैगजीन और 35 कारतूस।
- बरामदगी: पुलिस ने गोलियों के साथ 16 ग्राम स्मैक भी किया जब्त; नशे के कारोबार से जुड़े तार।
- गाज गिरी: लापरवाही बरतने वाले हवलदार दिलीप कुमार को एसपी ने किया सस्पेंड।
थाने के भीतर ‘घरभेदी’ का खेल: रसोइए ने ही लगा दिया पुलिस को चूना
भागलपुर: कहते हैं कि पुलिस की नजर से कोई नहीं बच सकता, लेकिन जब चोरी थाने के भीतर ही हो जाए, तो सवाल खाकी की मुस्तैदी पर उठने लाजमी हैं। नवगछिया पुलिस जिला के भवानीपुर थाने में एक ऐसी ही शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ सालों से खाना बनाने वाले रसोइए ने थाने की सुरक्षा में ही सेंध लगा दी। रसोइए ने न केवल हवलदार के सरकारी कारतूस चोरी किए, बल्कि वह नशे के काले कारोबार में भी लिप्त पाया गया।
[कैसे हुई वारदात? ‘चाबी’ ने बिगाड़ा खेल]
थाने में पदस्थापित हवलदार दिलीप कुमार कुछ दिनों के लिए अवकाश (Leave) पर गए थे। उन्होंने अपना बैग थाने में ही छोड़ दिया था।
- भारी चूक: हवलदार ने बैग के ताले की चाबी कहीं और रखने के बजाय बैग के नीचे ही छिपा दी थी।
- मौका देख मारा हाथ: थाने के रसोइए राजन कुमार को इसकी भनक लग गई। उसने मौका पाकर ताला खोला और 2 मैगजीन व 35 राउंड गोलियां पार कर दीं।
- खुलासा: 7 मार्च को जब हवलदार लौटे, तो बैग खाली देख उनके होश उड़ गए। सीसीटीवी फुटेज और सख्ती से पूछताछ के बाद रसोइए का काला चिट्ठा खुल गया।
[गिरफ्तारी और बरामदगी का ब्यौरा]
पुलिस ने इस मामले में रसोइए समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से जो सामान मिला, उसने पुलिस को चौंका दिया:
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नाम |
निवासी |
बरामद सामान |
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राजन कुमार (रसोइया) |
चकरामी, भवानीपुर |
2 मैगजीन, 35 राउंड गोली |
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दिवाकर यादव |
नारायणपुर, भवानीपुर |
16 ग्राम स्मैक (नशीला पदार्थ) |
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गंभीर कुमार |
नगरपारा, भवानीपुर |
मोबाइल और अन्य संदिग्ध सामान |
लापरवाही की सजा: हवलदार पर गिरी ‘सस्पेंशन’ की गाज
नवगछिया एसपी ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। एक पुलिसकर्मी द्वारा अपने संवेदनशील सामान (हथियार/कारतूस) की चाबी को असुरक्षित तरीके से छोड़ना ‘घोर लापरवाही’ माना गया है। इसी आधार पर हवलदार दिलीप कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
स्मैक और कारतूस: एक खतरनाक गठजोड़
गिरफ्तारी के दौरान 16 ग्राम स्मैक का मिलना यह संकेत देता है कि रसोइया और उसके साथी नशे के आदि थे। पुलिस अब इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या ये कारतूस किसी बड़े अपराधी गिरोह को बेचने के लिए चोरी किए गए थे या नशे की लत को पूरा करने के लिए पैसे जुटाने का यह जरिया था।
VOB का नजरिया: जब ‘बाड़ ही खेत खाने लगे’!
थाने के भीतर से गोलियां चोरी होना कोई छोटी बात नहीं है। यह घटना बताती है कि थानों में बाहरी कर्मियों (रसोइया, सफाईकर्मी) की गतिविधियों पर नजर रखना कितना जरूरी है। हवलदार दिलीप कुमार की सादगी कहें या लापरवाही, उन्होंने खुद ही चोर को दावत दे दी थी। सबसे डरावनी बात यह है कि ये 35 गोलियां अगर किसी अपराधी के हाथ लग जातीं, तो भागलपुर की सड़कों पर कितना खून बहता, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।


