- खलीफा बाग स्थित शाह मंज़िल में जुटे देश भर के विद्वान; ‘आर्किटेक्ट ऑफ एजुकेशन’ ने दी नई पीढ़ी को दिशा
- शिक्षा को केवल रोजगार नहीं, बल्कि किरदार और समाज निर्माण का जरिया बनाने पर दिया जोर
- संरक्षक सैयद शाह फखरे आलम ने कहा- ऐसे आयोजनों से समाज में आएगी नई चेतना और जागरूकता
द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)
भागलपुर के खलीफा बाग स्थित ऐतिहासिक शाह मंज़िल परिसर में आज शिक्षा और समाज के भविष्य को लेकर एक महामंथन हुआ। यहाँ “हिस्ट्री मेकिंग कॉन्फ्रेंस” (History Making Conference) का भव्य और सफल आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा, समाज निर्माण और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन जैसे गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद और शाहीन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (Shaheen Group of Institutions) के चेयरमैन डॉ. अब्दुल कादिर ने की।
शिक्षा को आधुनिक तकनीक और संस्कारों से जोड़ना जरूरी: डॉ. कादिर
शिक्षा जगत में अपने क्रांतिकारी प्रयोगों के लिए ‘आर्किटेक्ट ऑफ एजुकेशन’ के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ. अब्दुल कादिर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में एक बड़ा संदेश दिया।
- उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित रखना काफी नहीं है। इसे आधुनिक तकनीक (Modern Technology), नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ जोड़ना वक्त की मांग है।
- युवाओं से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “शिक्षा को केवल रोजगार पाने का माध्यम न मानें, बल्कि इसे समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का आधार बनाएं। शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को केवल डिग्री न दें, बल्कि उनके चरित्र निर्माण (Character Building) और नेतृत्व क्षमता को भी निखारें।”
शिक्षा: पाठ्यक्रम से परे एक जिम्मेदारी
सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वानों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सुर में कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
- वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक अवसर बढ़ाने और डिजिटल शिक्षा (Digital Education) के विस्तार की सख्त जरूरत है।
- नैतिक शिक्षा (Moral Education) को पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाने पर भी सभी ने सहमति जताई।
भविष्य में भी जलती रहेगी ज्ञान की मशाल
कार्यक्रम के संरक्षक सैयद शाह फखरे आलम हसन मजाहिरी ने आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया।
- उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। ऐसे कार्यक्रम समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस तरह के बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि शिक्षा और सामाजिक चेतना की लौ को और तेज किया जा सके।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अभिभावकों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि भागलपुर अब शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छूने को तैयार है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


