HIGHLIGHTS
- शर्मनाक: महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में शिक्षण संस्था के अध्यक्ष और कीर्तनकार पर 17 साल की लड़की से दरिंदगी का आरोप.
- आरोपी: यशवंत एकनाथ थोरात उर्फ अण्णासाहेब गुंजाळ (38) को पुलिस ने किया गिरफ्तार.
- क्रूरता की हद: विरोध करने पर मासूम को गरम चिमटे से जलाया और बांस से बुरी तरह पीटा.
- न्यायिक हिरासत: अदालत ने आरोपी को 20 मार्च 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा.
अहिल्यानगर/पारनेर | 17 मार्च, 2026
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता और धर्म के नाम पर उपदेश देने वालों को शर्मसार कर दिया है. पारनेर तालुका के ढवलीपुर गांव में एक ‘महाराज’ पर अपनी ही पड़ोसी नाबालिग लड़की के साथ पिछले 5 वर्षों से रेप करने और उसे नारकीय यातनाएं देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है.
भरोसे का कत्ल: 8वीं क्लास से शुरू हुआ ‘पाप’ का खेल
आरोपी यशवंत थोरात न केवल एक कीर्तनकार था, बल्कि एक शिक्षण संस्था का अध्यक्ष भी था.
- धोखा: पीड़िता का भाई इसी संस्था में सचिव था, जिसके कारण परिवारों के बीच गहरा भरोसा था.
- दहशत: यह सिलसिला साल 2021 से तब शुरू हुआ जब बच्ची महज 8वीं कक्षा में पढ़ती थी.
- धमकी: जब भी लड़की विरोध करती, आरोपी उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी देता और अपने पुराने हिंसक अपराधों का डर दिखाता था.
10 मार्च की वो खौफनाक रात: हैवानियत और ‘गरम चिमटा’
घटना ने 10 मार्च 2026 को तब और भी भयानक मोड़ ले लिया जब आरोपी ने पीड़िता को अपने घर बुलाया.
- निर्मम पिटाई: इनकार करने पर परिवार को खत्म करने की धमकी देकर उसे घर बुलाया और कंप्यूटर रूम में ले जाकर बांस और थप्पड़ों से बेरहमी से पीटा.
- जलाया: क्रूरता की हद पार करते हुए आरोपी ने रसोई में लोहे की चिमटी को गैस पर गरम किया और लड़की को जला दिया. इसके बाद भी उसने उसके साथ जबरदस्ती की.
भाई ने देखी बहन की हालत, तब खुला राज
14 मार्च को जब पीड़िता का भाई घर लौटा, तो बहन की शारीरिक हालत और जलने के निशान देखकर सन्न रह गया. भाई और ममेरे भाइयों के सामने रोते हुए पीड़िता ने 5 साल के उस नरक की कहानी सुनाई जो वह झेल रही थी. पारनेर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रविवार तड़के 4 बजे आरोपी को दबोच लिया. उसके खिलाफ BNS और POCSO Act के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
VOB का नजरिया: आस्था के नाम पर ‘कलंक’
यह मामला केवल एक यौन अपराध नहीं है, बल्कि उस ‘आस्था’ और ‘विश्वास’ पर प्रहार है जो समाज कीर्तनकारों और शिक्षकों पर करता है। 2021 से 2026 तक एक मासूम का घुट-घुट कर जीना और एक ‘शिक्षण संस्था’ के अध्यक्ष का ऐसी घिनौनी करतूत करना सिस्टम और समाज की विफलता को दर्शाता है। आरोपी का यह दावा कि उसने पहले भी हिंसक अपराध किए हैं, पुलिस के लिए जांच का बड़ा विषय होना चाहिए। क्या ऐसे ‘बाहुबली महाराज’ के पीछे किसी राजनीतिक या सामाजिक संरक्षण का हाथ है? कानून को इसे मिसाल बनाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई धर्म या शिक्षा की आड़ में ऐसी ‘असुर’ प्रवृत्ति न दिखाए।


