HIGHLIGHTS: 22 मार्च की तैयारी; गांधी मैदान में उतरेगा ‘साक्षात’ बिहार का वैभव
- बड़ा ऐलान: बिहार दिवस 2026 के अवसर पर राज्य के 5 सबसे प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों की भव्य ‘थ्री-डी’ (3D) प्रतिकृति बनाई जा रही है।
- आकर्षण का केंद्र: सीतामढ़ी का पुनौराधाम, वैशाली का बुद्ध स्तूप और राजगीर का ग्लास ब्रिज बनेगा असली ‘क्राउड पुलर’।
- हाइ-टेक अनुभव: एआर/वीआर (AR/VR) डिवाइस और टच स्क्रीन कियोस्क के जरिए पर्यटक डिजिटल सैर कर सकेंगे।
- बिहारी जायका: बिहार पर्यटन विकास निगम (BSTDC) की ओर से लजीज स्थानीय व्यंजनों का स्टॉल लगाया जाएगा।
📍 ‘डिजिटल बिहार’ डायरी: वो 5 लैंडमार्क्स जो गांधी मैदान की बढ़ाएंगे शान
इस बार पर्यटन विभाग ने टेबल या चार्ट के बजाय ‘लाइव एक्सपीरियंस’ पर जोर दिया है। यहाँ उन 5 प्रमुख स्थलों की सूची दी गई है जिनकी प्रतिकृतियां बनाई जा रही हैं:
- माता जानकी पुनौराधाम (सीतामढ़ी): रामायण सर्किट का यह प्रमुख केंद्र सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की झलक पेश करेगा।
- बुद्ध सम्यक दर्शन स्तूप (वैशाली): शांति और भगवान बुद्ध के अवशेषों के प्रतीक के रूप में इसकी भव्यता देखने लायक होगी।
- बापू टावर (पटना): महात्मा गांधी के विचारों और बिहार के गौरवशाली इतिहास का यह आधुनिक दर्पण होगा।
- जू व नेचर सफारी (राजगीर): प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह हिस्सा एडवेंचर का अहसास कराएगा।
- ग्लास ब्रिज/स्काई वॉक (राजगीर): आधुनिक बिहार की इंजीनियरिंग और ऊंचाइयों का सबसे लोकप्रिय सेल्फी पॉइंट बनेगा।
टेक्नोलॉजी और परंपरा का संगम: राजगीर की पहाड़ियों का ‘डिजिटल’ अहसास
पटना के गांधी मैदान में इस बार सिर्फ पोस्टर नहीं दिखेंगे, बल्कि ‘वर्चुअल दुनिया’ का अनुभव मिलेगा:
- एआर/वीआर (AR/VR): चश्मा पहनते ही आप राजगीर के ग्लास ब्रिज पर चलने का रोमांच या वैशाली के स्तूप की शांति महसूस कर सकेंगे।
- टूरिज्म सूचना केंद्र: पैवेलियन में बिहार की नई ‘टूरिज्म पॉलिसी’ और विभाग के आगामी प्रोजेक्ट्स की पूरी जानकारी डिजिटल कियोस्क पर मिलेगी।
- स्वाद का सफर: लिट्टी-चोखा, मखाना और गया के तिलकुट जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद पर्यटकों के सफर को यादगार बनाएगा।
VOB का नजरिया: क्या ‘प्रतिकृतियां’ बढ़ाएंगी बिहार का ‘पर्यटन ग्राफ’?
गांधी मैदान में ‘मिनी बिहार’ का यह मॉडल एक मास्टर स्ट्रोक है। अक्सर लोग पटना तो आते हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि महज कुछ घंटों की दूरी पर राजगीर या वैशाली में क्या खजाना छिपा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि पुनौराधाम और ग्लास ब्रिज जैसी प्रतिकृतियां न केवल सेल्फी पॉइंट बनेंगी, बल्कि ये युवाओं और बच्चों को अपनी संस्कृति की ओर खींचने का काम करेंगी।
प्रशासन को बस एक बात का ध्यान रखना होगा—भीड़ बहुत होगी, इसलिए सुरक्षा और सफाई के इंतज़ाम भी उतने ही ‘हाइ-टेक’ होने चाहिए जितनी ये प्रतिकृतियां हैं। आखिर बिहार की असली साख ‘हॉस्पिटैलिटी’ (मेहमानवाजी) से ही चमकती है।


