बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडल अंतर्गत डुमरी गांव में इन दिनों एक रहस्यमयी घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव के मंदिर परिसर में स्थित एक नीम के पेड़ से लगातार दूध जैसा सफेद तरल टपकने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीण इसे देवी का चमत्कार मान रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर रहे हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है।
दूध जैसा दिखने वाला तरल, पूजा-पाठ शुरू
ग्रामीणों के अनुसार, नीम के पेड़ से निकलने वाला तरल बिल्कुल दूध जैसा दिखता है। पेड़ पर लाल कपड़ा बांध दिया गया है और नियमित पूजा-पाठ शुरू कर दिया गया है। लोग गिलास, कटोरा और अन्य बर्तनों में इस तरल को एकत्र कर अपने घर ले जा रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने इसे “दुनिया का आठवां अजूबा” तक कहना शुरू कर दिया है।
प्रसाद मानकर किया जा रहा सेवन
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस तरल का स्वाद दूध जैसा है, हालांकि इसमें नीम की हल्की कड़वाहट महसूस होती है। कई लोगों ने इसे देवी का प्रसाद मानकर सेवन करने की बात स्वीकार की है और अपने परिवारजनों को भी पिलाने की बात कह रहे हैं।
ग्रामीण शैला देवी कहती हैं,
“महारानी स्वयं साक्षात प्रकट हुई हैं और गांव पर उनकी विशेष कृपा है। यह आध्यात्मिक चमत्कार है।”
वहीं मिथिलेश यादव का कहना है,
“महारानी आई हैं, कुछ दिनों से दूध गिर रहा है। यह चमत्कार है।”
ज्योतिषी के दावे से बढ़ी आस्था
स्थानीय ज्योतिषी शिव विलास पांडेय का दावा है कि यह तरल पिछले कई दिनों से लगातार निकल रहा है। उनके अनुसार,
24 घंटे में करीब 10 से 15 लीटर तरल गिर रहा है और बीते 10 दिनों में 160 से 170 लीटर तक तरल निकल चुका है।
ज्योतिषी के इस दावे के बाद गांव में आस्था और अधिक मजबूत हो गई है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
हालांकि, वैज्ञानिक इस घटना को चमत्कार मानने से इनकार कर रहे हैं। डुमरांव कृषि कॉलेज से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ विद्यानंद यादव के अनुसार,
“नीम के पेड़ से निकलने वाला यह दूध जैसा तरल वास्तव में लेटेक्स या दूधी रस हो सकता है। छाल में चोट लगने या कीटों के हमले के कारण ऐसा होना सामान्य है। यह पेड़ का प्राकृतिक रक्षा तंत्र है।”
वहीं डॉ साकेत ने चेतावनी दी कि
“इस प्रकार के रस का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। बिना वैज्ञानिक जांच के इसे पीना खतरनाक हो सकता है।”
आस्था बनाम विज्ञान की बहस
डुमरी गांव में यह घटना अब आस्था बनाम विज्ञान की बहस का रूप ले चुकी है। एक ओर श्रद्धालु इसे दैवीय कृपा मान रहे हैं, तो दूसरी ओर वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक प्रक्रिया बता रहे हैं। फिलहाल गांव में श्रद्धा का माहौल बना हुआ है और नीम का यह पेड़ लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।


