चंडी में भ्रष्टाचार की ‘क्लास’! BEO के लिए 17 हजार घूस लेते संसाधन शिक्षक गिरफ्तार; नालंदा में निगरानी ब्यूरो का बड़ा ‘धमाका’

HIGHLIGHTS

  • रंगे हाथ गिरफ्तार: प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) के लिए रिश्वत लेते संसाधन शिक्षक मनोज कुमार वर्मा दबोचे गए।
  • भ्रष्टाचार का केंद्र: गिरफ्तारी चंडी BEO पुष्पा कुमारी के कार्यालय कक्ष से ही हुई।
  • वजह: शिक्षक के लंबित अंतर वेतन (Arrear) और वार्षिक वेतन वृद्धि के भुगतान के बदले मांगी गई थी घूस।
  • निगरानी का एक्शन: डीएसपी अमरेंद्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में टीम ने की छापेमारी।

नालंदा (चंडी) | 17 मार्च, 2026

​नालंदा के चंडी प्रखंड में शिक्षा विभाग की साख पर एक बार फिर बट्टा लगा है। जिस विभाग का काम ज्ञान की अलख जगाना है, वहां ‘वेतन’ के बदले ‘कमीशन’ का खेल चल रहा था। सोमवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडी BEO पुष्पा कुमारी के ‘खास’ माने जाने वाले संसाधन शिक्षक मनोज कुमार वर्मा को 17 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार कर लिया।

शिक्षक का हक और ‘साहब’ की घूस

​मामला भ्रष्टाचार की उस कड़वी सच्चाई से जुड़ा है जहाँ एक शिक्षक को अपना ही हक पाने के लिए दलालों की चौखट चूमनी पड़ती है।

  • शिकायतकर्ता: चंडी के धर्मेंद्र कुमार ने हिम्मत दिखाते हुए निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी।
  • मांग: धर्मेंद्र कुमार का अंतर वेतन और वार्षिक वेतन वृद्धि लंबित थी, जिसे पास करने के बदले BEO पुष्पा कुमारी द्वारा घूस की मांग की जा रही थी।
  • सत्यापन: ब्यूरो ने जब शिकायत की जांच की, तो घूस मांगे जाने का ठोस प्रमाण मिला, जिसके बाद जाल बिछाया गया।

ऑफिस में रेड और हड़कंप

​निगरानी विभाग के डीएसपी अमरेंद्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में गठित धावा दल ने सुनियोजित तरीके से BEO कार्यालय में धावा बोला।

  1. गिरफ्तारी: जैसे ही संसाधन शिक्षक मनोज कुमार वर्मा ने धर्मेंद्र कुमार से ₹17,000 लिए, टीम ने उन्हें दबोच लिया।
  2. FIR: बीईओ पुष्पा कुमारी के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
  3. अगली कार्रवाई: गिरफ्तार शिक्षक से पूछताछ जारी है और उन्हें जल्द ही पटना स्थित निगरानी के विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा।

VOB का नजरिया: जब रक्षक ही ‘कमीशनखोर’ बन जाए!

​नालंदा की यह घटना बिहार के सरकारी तंत्र की उस बीमारी को उजागर करती है जहाँ फाइलें बिना ‘तेल’ (रिश्वत) के नहीं खिसकतीं। एक शिक्षक का वेतन और इंक्रीमेंट उसका वैधानिक अधिकार है, लेकिन उसे पाने के लिए भी 17 हजार की बोली लगाई जा रही थी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ निगरानी ब्यूरो की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल ‘कलेक्टर’ (पैसा वसूलने वाला शिक्षक) की गिरफ्तारी काफी है? मुख्य आरोपी बीईओ पर कड़ा एक्शन होना चाहिए ताकि विभाग में बैठे अन्य ‘पुष्पा’ जैसे अधिकारियों को सबक मिल सके।

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