मौनी अमावस्या पर वाल्मीकि नगर के त्रिवेणी संगम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

मौनी अमावस्या के अवसर पर रविवार को बिहार के पश्चिम चंपारण जिले स्थित वाल्मीकि नगर में नेपाल सीमा के समीप प्रसिद्ध त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पवित्र स्नान के लिए श्रद्धालु बीते तीन दिनों से लगातार वाल्मीकि नगर पहुंच रहे थे। अमावस्या की सुबह होते ही संगम तट पर स्नानार्थियों की लंबी कतारें देखी गईं।

पापों के नाश और पुण्य की कामना

बिहार, नेपाल समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

रामायण काल से जुड़ा है त्रिवेणी संगम

संगम में स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु तारकेश्वर नाथ पांडे ने बताया कि इस स्थल का इतिहास भगवान राम के समय से जुड़ा माना जाता है। मान्यता के अनुसार माता सीता को जीवन में अनेक कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ा।

“कहा जाता है कि अंतिम बार अग्नि परीक्षा न देकर माता सीता पृथ्वी में समा गई थीं। जिस स्थान पर वह पृथ्वी में समाईं, वहां से तीन धाराएं निकलीं, इसी कारण इस स्थल को त्रिवेणी संगम कहा जाता है।”
— तारकेश्वर नाथ पांडे, श्रद्धालु

प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल

त्रिवेणी संगम गंडक (नारायणी), सोनहा (सोनभद्र), पचनद (तमसा) और सप्त गंडकी नदियों के संगम से बनता है। इन नदियों के मिलन के कारण यह स्थल उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थलों में शामिल है। गंडक नदी इस संगम की मुख्य धारा है, जिसे भारत और नेपाल दोनों देशों में अत्यंत पवित्र माना जाता है।

मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या पितरों को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि गंडक तट पर स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार वाल्मीकि नगर का त्रिवेणी संगम प्रयागराज के त्रिवेणी संगम के समान ही पवित्र है। यह क्षेत्र महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि के रूप में भी प्रसिद्ध है, जहां वाल्मीकि आश्रम स्थित होने की मान्यता है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मौनी अमावस्या को लेकर प्रशासन ने संगम क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल, गोताखोर और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और स्नान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके।

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