
बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की 10 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के साथ ही बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश राजनीतिक और कानूनी दोनों कारणों से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। एनडीए की ओर से घोषित उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम नहीं होने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
दीपक प्रकाश का नाम लंबे समय से संभावित एमएलसी उम्मीदवारों में माना जा रहा था, लेकिन भाजपा-जेडीयू और सहयोगी दलों द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची में उन्हें जगह नहीं मिली। इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।
फेसबुक प्रोफाइल से हटाया ‘मंत्री’ शब्द

एमएलसी उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद दीपक प्रकाश ने अपने फेसबुक प्रोफाइल के बायो से “मंत्री” शब्द हटा दिया। इस कदम के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि इस बदलाव को लेकर उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
इधर, दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाए जाने का मामला अब Supreme Court of India तक पहुंच गया है। उनके खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) में उनकी नियुक्ति की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है।
याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला देते हुए कहा गया है कि कोई व्यक्ति विधायक या विधान परिषद सदस्य बने बिना अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। यदि वह इस अवधि के भीतर किसी सदन का सदस्य नहीं बनता, तो उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।
पुनर्नियुक्ति पर उठे सवाल
याचिका के अनुसार, दीपक प्रकाश ने पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। निर्धारित अवधि के भीतर वे विधायक या विधान पार्षद नहीं बन सके।
इसके बावजूद 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली नई सरकार में उन्हें फिर से मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। याचिकाकर्ता ने इसी पुनर्नियुक्ति की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया है।
MLC चुनाव में नहीं मिला मौका

एनडीए ने विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा और जदयू के चार-चार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जबकि एक सीट सहयोगी दल को दी गई है। लेकिन दीपक प्रकाश को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि सरकार उन्हें सदन का सदस्य बनाने के लिए आगे कौन-सा रास्ता अपनाएगी।
बढ़ सकती हैं राजनीतिक चुनौतियां
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में संवैधानिक प्रश्नों पर विस्तृत सुनवाई करता है, तो इसका असर न केवल दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर पड़ सकता है बल्कि सरकार को भी कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल एक तरफ विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया जारी है, तो दूसरी तरफ दीपक प्रकाश का मंत्री पद, उनकी संवैधानिक स्थिति और राजनीतिक भविष्य चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।


