मंजूषा महोत्सव में तसर सिल्क और मंजूषा कला का अद्भुत संगम, फैशन शो में दिखी भागलपुर की सांस्कृतिक छटा

मंच पर तसर सिल्क साड़ियों में सजी मॉडल्स ने दिखाई जीआई टैग प्राप्त मंजूषा आर्ट की झलक, छठ पर्व की आस्था भी हुई प्रस्तुत

भागलपुर: भागलपुर में आयोजित मंजूषा महोत्सव के दौरान एक भव्य फैशन शो का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कला, संस्कृति और परंपरा की शानदार झलक देखने को मिली। इस फैशन शो में अंग क्षेत्र की प्रसिद्ध लोककला मंजूषा आर्ट और भागलपुर की पहचान तसर सिल्क का अनोखा संगम मंच पर देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान जब मॉडल्स तसर सिल्क की साड़ियों में रैंप पर उतरीं तो साड़ियों पर उकेरी गई मंजूषा कला की पारंपरिक आकृतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। रंग-बिरंगी साड़ियों पर सजी यह लोककला मंच पर बेहद आकर्षक दिखाई दी और कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे खूब सराहा।

फैशन के जरिए दिखी सांस्कृतिक विरासत

आयोजकों के अनुसार यह फैशन शो केवल आधुनिक फैशन का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से भागलपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला को भी मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।

मंच पर उतरी मॉडल्स ने न केवल तसर सिल्क साड़ियों की खूबसूरती को प्रदर्शित किया, बल्कि उनमें उकेरी गई मंजूषा कला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाया। सुंदर साड़ियों में सजी महिलाओं की गरिमा और मंजूषा कला की पारंपरिक शैली ने पूरे कार्यक्रम को खास बना दिया।

छठ पर्व की भी दिखाई गई झलक

फैशन शो के दौरान बिहार के महापर्व छठ की सांस्कृतिक छटा भी मंच पर देखने को मिली। मॉडल्स ने पारंपरिक सनातनी अंदाज में छठ पर्व की आस्था, परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व को प्रस्तुत किया।

मंच पर छठ पूजा की झलक और उससे जुड़े प्रतीकों को दर्शकों के सामने बेहद आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ सराहा।

स्थानीय कला को मिला नया मंच

इस कार्यक्रम के माध्यम से भागलपुर की पहचान बनी मंजूषा कला और तसर सिल्क को नए और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई। आयोजकों का कहना है कि इस तरह के आयोजन से स्थानीय कलाकारों और बुनकरों को भी प्रोत्साहन मिलता है।

साथ ही यह प्रयास क्षेत्रीय कला और संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मंजूषा महोत्सव में आयोजित इस फैशन शो ने यह संदेश दिया कि पारंपरिक कला और आधुनिक प्रस्तुति का संगम करके स्थानीय संस्कृति को नई पहचान दी जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और उन्होंने भागलपुर की इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का भरपूर आनंद लिया।

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