रजौन में ‘जमीन की जंग’, अपनों ने ही बहाया खून! 2008 के बंटवारे पर ‘गोतिया’ में खूनी संघर्ष; एक की हालत नाजुक

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • वारदात: रजौन थाना क्षेत्र के चकमा मोड़ पर जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों (गोतिया) में जमकर मारपीट।
  • तारीख: 3 मार्च की शाम (होली के दिन) करीब 6:00 बजे हुई घटना।
  • पीड़ित: बल्लों मंडल (पिता- सोनू मंडल) गंभीर रूप से घायल; मायागंज रेफर।
  • आरोप: 2008 में हुए जमीन बंटवारे को मानने से इनकार कर रहा दूसरा पक्ष।

भागलपुर/रजौन: बिहार में जमीन के टुकड़े के लिए अपनों का खून बहाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला रजौन थाना क्षेत्र के चकमा मोड़ से सामने आया है, जहाँ जमीन विवाद को लेकर एक ही परिवार (गोतिया) के सदस्य आपस में भिड़ गए। इस खूनी संघर्ष में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसका इलाज भागलपुर के मायागंज अस्पताल में चल रहा है।

18 साल पुराने बंटवारे पर ‘बवाल’

​घायल बल्लों मंडल के अनुसार, विवाद की जड़ साल 2008 में हुआ जमीन का बंटवारा है।

  • पीड़ित का दावा: बल्लों मंडल का कहना है कि 2008 में ही परिवार के बीच जमीन का बराबर हिस्सा हो चुका था।
  • विवाद की वजह: आरोप है कि उनके गोतिया (रिश्तेदार) अब उस पुराने समझौते को मानने से इनकार कर रहे हैं और जबरन जमीन पर अपना हक जता रहे हैं। इसी बात को लेकर मंगलवार शाम बहस शुरू हुई जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।

जोगिंदर मंडल पर मारपीट और दिलीप पर ‘आग लगाने’ का आरोप

​घायल बल्लों मंडल ने पुलिस को दिए बयान में हमलावरों के नामजद आरोप लगाए हैं:

  1. मुख्य हमलावर: आरोप है कि जोगिंदर मंडल ने बल्लों के साथ बेरहमी से मारपीट की।
  2. साजिशकर्ता: पीड़ित ने दिलीप मंडल पर इस पूरे झगड़े को भड़काने और उकसाने का गंभीर आरोप लगाया है।

इलाज और पुलिसिया कार्रवाई

​घटना के तुरंत बाद लहूलुहान बल्लों को रजौन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

  • रेफर: प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें मायागंज अस्पताल (भागलपुर) रेफर कर दिया।
  • थाने में शिकायत: पीड़ित पक्ष की ओर से रजौन थाने में लिखित आवेदन दे दिया गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और दोषियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की बात कही जा रही है।

VOB का नजरिया: कागजों पर सुलझती नहीं, सड़कों पर उलझती जमीन

​बिहार में होने वाले अपराधों का एक बड़ा प्रतिशत केवल ‘जमीन विवाद’ से जुड़ा है। चकमा मोड़ की यह घटना एक बार फिर बताती है कि आपसी समझ और कानूनी पारदर्शिता की कमी कैसे रिश्तों में जहर घोल रही है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि जमीन विवाद के लंबित मामलों का जल्द निपटारा करे ताकि ऐसी हिंसक घटनाओं पर रोक लग सके।

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