बोले कृषि मंत्री—“यह बजट गांव, गरीब और किसान को केंद्र में रखकर बना”
शोध, सस्ती खाद और हाई-वैल्यू फसलों पर बड़ा फोकस
पटना।बिहार सरकार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने केंद्रीय बजट में कृषि, ग्रामीण विकास और पंचायत सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रावधानों का जोरदार स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह बजट साफ तौर पर “गांव, गरीब और किसान” को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, जो केंद्र सरकार की ग्रामीण भारत के समग्र विकास के प्रति ऐतिहासिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कृषि बजट में बड़ी बढ़ोतरी
राम कृपाल यादव ने बताया कि कृषि क्षेत्र के लिए बजट बढ़ाकर 1,32,561 करोड़ रुपये किया गया है।
इसके साथ ही कृषि शिक्षा और शोध के लिए, विशेषकर आईसीएआर के लिए 9,967 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे नई तकनीक, उन्नत बीज और नवाचार किसानों तक पहुंचेंगे।
सस्ती खाद से घटेगी खेती की लागत
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने के लिए 1,70,944 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आमदनी में वास्तविक वृद्धि संभव होगी।
फाइबर और औषधीय खेती को मिलेगा बढ़ावा
उन्होंने बताया कि नेशनल फाइबर स्कीम के तहत सिल्क, ऊन और जूट जैसी फाइबर फसलों पर विशेष फोकस किया गया है। इससे इन क्षेत्रों से जुड़े किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
साथ ही आयुष मंत्रालय के माध्यम से औषधीय पौधों के सर्टिफिकेशन और निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे औषधीय खेती करने वाले किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
हाई-वैल्यू फसलों पर भी जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नारियल, कोको, काजू और चंदन जैसी उच्च-मूल्य फसलों के लिए भी बजटीय व्यवस्था की गई है।
नारियल के पुराने बागों के पुनरुद्धार और नए बाग लगाने से किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, फल और सब्ज़ी उत्पादन व विपणन के लिए किए गए प्रावधानों से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और उपभोक्ताओं तक ताजा उत्पाद आसानी से पहुंचेंगे।
“विकसित भारत की नींव”
अंत में राम कृपाल यादव ने कहा कि यह बजट विकसित भारत के संकल्प को जमीन पर उतारने वाला है। इससे बिहार सहित पूरे देश के किसान, गांव और पंचायतें सशक्त होंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।


