बिहार के सुदूर गांवों में सड़कों का ‘महासंग्राम’: 100 की आबादी वाले टोले भी जुड़ेंगे मुख्यधारा से; 3300 किमी नई सड़क और 300 पुलों का महा-लक्ष्य

पटना | 26 फरवरी, 2026: बिहार के ग्रामीण अंचलों की सूरत बदलने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने मिशन मोड में काम शुरू कर दिया है। विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत राज्य के उन छोटे टोलों और बसावटों को भी ‘बारहमासी’ (All-weather) सड़कों से जोड़ा जाएगा जिनकी आबादी मात्र 100 या उससे अधिक है। इस विशाल योजना के तहत अकेले इस वर्ष 3300 किलोमीटर ग्रामीण पथों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

योजनावार लक्ष्य: विकास की नई पटरी

​ग्रामीण कार्य विभाग ने विभिन्न योजनाओं के जरिए राज्य के हर कोने तक पहुँचने की तैयारी की है:

योजना का नाम

मुख्य लक्ष्य (FY 2026-27)

लक्षित आबादी/क्षेत्र

मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष)

3,000 किमी पथ निर्माण और 4,500 बसावटों की स्वीकृति

100 या अधिक आबादी वाली छूटी हुई बसावटें

ग्रामीण टोला संपर्क निश्चय योजना

शेष बचे कार्यों का 100% समापन

100 से 249 की आबादी वाले 4,643 सर्वेक्षित टोले

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)

300 किमी सड़क और 300 पुलों का निर्माण

सुदूर ग्रामीण क्षेत्र एवं नदीय बाधाएं

पुलों और पुरानी सड़कों का कायाकल्प

​सिर्फ नई सड़कें ही नहीं, बल्कि आवागमन को सुगम बनाने के लिए बुनियादी ढांचे पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है:

  • पुलों का जाल: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत इस वर्ष 300 नए पुलों का निर्माण किया जाएगा, ताकि नदियों और नालों के कारण कटी आबादी को जोड़ा जा सके।
  • सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन: विभाग का ध्यान पुरानी सड़कों के रख-रखाव पर भी है। इसके तहत 18,166 ग्रामीण सड़कों (लगभग 30,966 किमी) के शुरुआती सुधार, माइनर इम्प्रूवमेंट और सरफेस रिन्यूवल का कार्य अगले वित्तीय वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है।
  • वर्तमान प्रगति: अब तक 9,176 किलोमीटर सड़क के सतह (Surface) का कार्य पूर्ण हो चुका है और 470 पथों का कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया गया है।

हर बसावट तक बारहमासी संपर्कता का संकल्प

​विभाग की इस विस्तृत कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के 13,814 असंपर्कित बसावटों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए कुल 16,652 किलोमीटर लंबे ग्रामीण पथों के निर्माण का खाका तैयार किया गया है।

“हमारा संकल्प है कि राज्य का कोई भी हिस्सा पक्की और बारहमासी सड़क सम्पर्कता से अछूता न रहे। ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूत करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” > — ग्रामीण कार्य विभाग की आधिकारिक रणनीति का सार

VOB का नजरिया: क्या समय पर पूरा होगा सपना?

​बिहार में बाढ़ और जलजमाव जैसी प्राकृतिक चुनौतियां अक्सर सड़क निर्माण में बाधक बनती हैं। विभाग द्वारा 100 की आबादी वाले टोलों को प्राथमिकता देना एक क्रांतिकारी कदम है, क्योंकि यही छोटे टोले अब तक विकास की दौड़ में सबसे पीछे रहे हैं। 300 पुलों का निर्माण विशेष रूप से उत्तर बिहार के इलाकों के लिए संजीवनी साबित होगा। हालांकि, सड़कों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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