
HIGHLIGHTS: सर्वाइकल कैंसर से बेटियों को बचाने की बड़ी मुहिम; तीन महीने तक चलेगा विशेष टीकाकरण, यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की निगरानी में तैयार हुआ ब्लूप्रिंट
- बड़ी शुरुआत: भागलपुर जिले में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाव के लिए ‘गाडासिल एचपीवी’ (Gardasil HPV) वैक्सीनेशन का विधिवत शुभारंभ।
- मुफ्त सुरक्षा: निजी अस्पतालों में हजारों में मिलने वाला यह टीका अब सरकारी केंद्रों पर 14 से 15 वर्ष की बच्चियों को पूरी तरह मुफ्त दिया जा रहा है।
- विस्तार: सदर अस्पताल और मायागंज के अलावा जिले के सभी प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर शुरू हुई टीकाकरण की सुविधा।
- समय सीमा: सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने दी जानकारी— अगले तीन माह तक चलेगा यह विशेष अभियान।
- ग्लोबल पार्टनरशिप: यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ (WHO), यूएनडीपी (UNDP) और जेएसआई (JSI) के सहयोग से रणनीति तैयार।
- VOB इनसाइट: महिलाओं में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह टीका भविष्य की पीढ़ी के लिए ‘जीवनरक्षक’ साबित होगा।
भागलपुर | 25 मार्च, 2026
भागलपुर जिले की बेटियों के बेहतर स्वास्थ्य और कैंसर मुक्त भविष्य की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार, 24 मार्च को जिले के तमाम सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए ‘गाडासिल एचपीवी’ (HPV) टीकाकरण अभियान का बिगुल फूंक दिया गया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह टीका उन किशोरियों के लिए वरदान साबित होगा जो भविष्य में इस घातक बीमारी के जोखिम से सुरक्षित रहना चाहती हैं।
14-15 साल की बच्चियों के लिए ‘सुरक्षा घेरा’
इस टीकाकरण अभियान का प्राथमिक लक्ष्य 14 वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक की आयु वर्ग की बच्चियां हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उम्र में एचपीवी वैक्सीन का प्रभाव सबसे अधिक होता है, जो आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर की संभावना को लगभग शून्य कर देता है।
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने जिले के तमाम अभिभावकों से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि वे इस अवसर को न चूकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान अगले तीन महीनों तक निरंतर जारी रहेगा, ताकि कोई भी पात्र बच्ची इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।
VOB डेटा चार्ट: भागलपुर एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान — मुख्य जानकारी
श्रेणी | विवरण और नियम |
|---|---|
टीके का नाम | गाडासिल एचपीवी (Gardasil HPV) |
लक्षित आयु वर्ग | 14 वर्ष से 15 वर्ष की बच्चियां |
शुल्क | पूरी तरह निःशुल्क (सरकारी केंद्रों पर) |
अभियान की अवधि | 24 मार्च 2026 से अगले 3 माह तक |
प्रमुख केंद्र | सदर अस्पताल, मायागंज अस्पताल एवं सभी प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र |
तकनीकी सहयोगी | UNICEF, WHO, UNDP एवं JSI |
निगरानी | सिविल सर्जन एवं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी |
संध्याकालीन बैठक: मिशन मोड में स्वास्थ्य महकमा
अभियान के पहले ही दिन सदर और प्रखंड अस्पतालों में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की गई। इन बैठकों में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ और यूएनडीपी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के मुख्य बिंदु:
- कोल्ड चेन प्रबंधन: टीकों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कोल्ड चेन की निरंतर निगरानी का निर्देश।
- जागरूकता अभियान: ग्रामीण इलाकों में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए अभिभावकों को प्रेरित करना।
- डेटा एंट्री: टीकाकरण की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए यू-विन (U-WIN) जैसे पोर्टल्स का उपयोग।
- फीडबैक तंत्र: टीकाकरण के बाद बच्चियों की सेहत की जानकारी और किसी भी तरह के छोटे-मोटे साइड इफेक्ट्स (यदि हों) के प्रबंधन की तैयारी।
VOB का नजरिया: क्यों जरूरी है यह टीका?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि सर्वाइकल कैंसर बिहार की महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है।
- आर्थिक राहत: बाजार में इस टीके की एक खुराक की कीमत 2000 से 4000 रुपये तक होती है। सरकार द्वारा इसे मुफ्त देना गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत है।
- भ्रम से बचें: कुछ लोग टीकाकरण को लेकर अफवाहें फैला सकते हैं, लेकिन डब्ल्यूएचओ जैसी संस्थाओं का जुड़ाव यह प्रमाणित करता है कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रभावी है।
- शिक्षण संस्थानों की भूमिका: स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वे स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के साथ समन्वय बिठाएं ताकि 14-15 साल की लड़कियों तक आसानी से पहुँचा जा सके।
सुशासन और स्वस्थ समाज की नींव
भागलपुर में एचपीवी टीकाकरण की शुरुआत सुशासन और ‘हेल्थ फर्स्ट’ की नीति का एक शानदार उदाहरण है। सिविल सर्जन की अपील पर अब जिम्मेदारी समाज की है कि वे अपनी बेटियों को इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित करें। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस टीकाकरण अभियान की प्रगति और आपके ब्लॉक में उपलब्ध स्टॉक की हर अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।


