पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को के प्रदेश कार्यालय, पटना में पारंपरिक दही-चूड़ा और तिलकुट का भव्य भोज आयोजित किया जाएगा। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रहेगी, वहीं अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि दही-चूड़ा भोज का राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टि से खास महत्व होता है। एक ओर यह आयोजन बिहार की लोक-परंपरा को मंच देता है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग दलों के नेताओं की मौजूदगी से सियासी मेल-मिलाप और संवाद की तस्वीर भी सामने आती है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि ऐसे आयोजनों में सिर्फ भोज नहीं, बल्कि राजनीतिक खिचड़ी भी पकती है। मंच के बाहर अनौपचारिक मुलाकातें, गर्मजोशी भरी बातचीत और आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा—इन सब पर सबकी नजर रहती है। यही वजह है कि दही-चूड़ा भोज में किस नेता की मौजूदगी रही और कौन नहीं आया, यह भी सुर्खियों में रहता है।
इस साल भी मकर संक्रांति को लेकर कई राजनीतिक दलों और नेताओं ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि भाजपा के इस आयोजन में विभिन्न दलों के नेताओं की शिरकत से सियासी संदेश जाएगा और बिहार की राजनीति में नए संकेत भी मिल सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दही-चूड़ा भोज अब सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का अनौपचारिक मंच बन चुका है, जहां रिश्ते भी बनते हैं और समीकरण भी।


