दिनांक: 13 जुलाई 2025 | सुल्तानगंज, भागलपुर
सावन के पावन महीने में सुल्तानगंज से देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर लाखों कांवरिए गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकल चुके हैं। इस बीच एक भावुक और अनोखी तस्वीर ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा — जहां एक श्रद्धालु ने कांवड़ में गंगाजल के साथ अपने मासूम बच्चे को बैठाकर यात्रा शुरू की।
कोलकाता से आए रंजीत की मन्नत और आस्था
यह दृश्य है कोलकाता से आए कांवड़िया रंजीत का, जिन्होंने अपनी मन्नत पूरी होने पर बाबा बैद्यनाथ की ओर विशेष कृतज्ञता यात्रा शुरू की। रंजीत ने बताया कि उन्होंने बाबा भोलेनाथ से संतान की मन्नत मांगी थी, और संतान प्राप्ति के बाद उन्होंने संकल्प लिया था कि वे अपने बच्चे को कांवड़ में बिठाकर पैदल यात्रा करेंगे। अब जब मन्नत पूरी हुई, तो उन्होंने श्रद्धा के साथ गंगाजल और अपने बच्चे को एक साथ कांवड़ में रख यात्रा शुरू की है।
कांवड़ में गंगाजल और मासूम के बीच संतुलन
रंजीत की कांवड़ में एक ओर पवित्र गंगाजल का कलश रखा गया है, तो दूसरी ओर उनका नन्हा बच्चा पूरी मासूमियत के साथ बैठा है। राहगीरों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच यह दृश्य श्रद्धा, वात्सल्य और आस्था के मिलन का प्रतीक बन चुका है।
आस्था में डूबे लाखों श्रद्धालु
सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर 105 किलोमीटर की डाक कांवड़ यात्रा पर निकले लाखों श्रद्धालु हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष के साथ देवघर की ओर बढ़ रहे हैं। श्रद्धा और भक्ति का यह सैलाब पूरे कांवर पथ पर उमड़ पड़ा है।
श्रद्धा के इस रूप से प्रेरित हो रहा समाज
रंजीत की यह यात्रा न सिर्फ धार्मिक संकल्प की पूर्ति है, बल्कि यह दर्शाती है कि भक्ति सिर्फ पूजा का नाम नहीं, यह जीवन की भावनाओं से जुड़ी एक गहरी अनुभूति है। उनका यह कदम हजारों लोगों को प्रेरित कर रहा है कि धर्म और परंपरा को जीवन के अनुभवों से कैसे जोड़ा जाए।
सावन का महीना वैसे तो श्रद्धा, संयम और समर्पण का प्रतीक है, लेकिन कांवड़ में अपने बच्चे को साथ लेकर की जा रही यह पदयात्रा इसे और भी मानवता और संवेदना से भर देती है। रंजीत जैसे भक्त यह संदेश देते हैं कि “जहां भाव है, वहीं भगवान हैं।”


