अंग जनपद की कला का शंखनाद! भागलपुर में तीन दिवसीय ‘मंजूषा महोत्सव’ का शानदार आगाज; सैनडिस् मैदान में बिखरे सांस्कृतिक रंग

भागलपुर | 09 मार्च, 2026-अंग प्रान्त की समृद्ध लोक कला और विरासत को समर्पित ‘मंजूषा महोत्सव’ ने सोमवार को भागलपुर की फिजाओं में अपनी चमक बिखेर दी। राजधानी पटना और स्थानीय कलाकारों की जुगलबंदी के बीच, भागलपुर के ऐतिहासिक सैनडिस् मैदान स्थित ओपन थिएटर में तीन दिवसीय मंजूषा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर इस उत्सव का विधिवत उद्घाटन किया।

सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की मुहिम

​मंजूषा कला केवल रंगों और रेखाओं का खेल नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र की पहचान और लोक गाथाओं का जीवंत दस्तावेज़ है।

  • उद्घाटन: जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलन के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और इस कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
  • प्रमुख उपस्थिति: इस अवसर पर उप विकास आयुक्त (DDC) श्री प्रदीप कुमार सिंह, कहलगांव अनुमंडल पदाधिकारी श्री कृष्ण चंद्रगुप्त और जिला कला संस्कृति पदाधिकारी सहित प्रशासन के कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे।

रंगारंग आगाज: पटना और स्थानीय कलाकारों का संगम

​उद्घाटन सत्र के बाद ओपन थिएटर का मंच कला और संस्कृति के रंगों से सराबोर हो गया।

  • पटना के कलाकारों का जलवा: बिहार की राजधानी से आए पेशेवर कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
  • स्थानीय प्रतिभा: भागलपुर के स्थानीय कलाकारों ने मंजूषा लोक कला पर आधारित नृत्य और नाटकों के जरिए अपनी माटी की खुशबू बिखेरी।
  • तीन दिन का उत्सव: यह महोत्सव अगले तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें हर शाम अलग-अलग विधाओं के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मंजूषा महोत्सव: क्यों है खास?

​मंजूषा कला, जिसे ‘अंगिका पेंटिंग’ भी कहा जाता है, बिहुला-विषहरी की लोककथाओं पर आधारित है। इस महोत्सव का उद्देश्य इस लुप्त होती कला को पुनर्जीवित करना और नए कलाकारों को एक मंच प्रदान करना है। सैनडिस् मैदान का ओपन थिएटर इस कलात्मक विमर्श के लिए सबसे उपयुक्त स्थान साबित हो रहा है, जहाँ आम जन भी बड़ी संख्या में जुट रहे हैं।

VOB का नजरिया: कला का सम्मान ही शहर की असली पहचान!

अक्सर सरकारी उत्सव केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं, लेकिन मंजूषा महोत्सव जैसे आयोजन भागलपुर की ‘सिल्क सिटी’ वाली पहचान में ‘संस्कृति का सिल्क’ जोड़ते हैं। भागलपुर के सैनडिस् मैदान में उमड़ी भीड़ इस बात का सबूत है कि यहाँ के लोगों के दिलों में अपनी लोक कला के प्रति आज भी गहरा अनुराग है। उम्मीद है कि यह तीन दिवसीय आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित न रहकर मंजूषा कलाकारों के लिए आर्थिक अवसरों के नए द्वार भी खोलेगा।

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