वर्ष 2015 में मृत महिला को 2024 में जीवित दर्शाकर किया गया नामांतरण, प्रशासन ने शुरू की जांच
भागलपुर:
भागलपुर जिले के सदर अंचल क्षेत्र से भूमि नामांतरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस प्रकरण ने राजस्व अभिलेखों की सत्यता, नामांतरण प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015 में जिन महिला का निधन हो चुका था, उन्हें वर्ष 2024 में कागज़ों पर जीवित दर्शाते हुए उनकी भूमि का नामांतरण कर दिया गया। मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मृत महिला के नाम पर किया गया नामांतरण
बताया गया है कि संबंधित महिला बेबी शेख उर्फ रुखसार निशा थीं, जिनकी मृत्यु 06 अप्रैल 2015 को हो चुकी थी। नगर निगम द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र भी रिकॉर्ड में उपलब्ध है। इसके बावजूद वर्ष 2024 में राजस्व अभिलेखों में उन्हें जीवित दिखाते हुए उनकी जमीन का नामांतरण किया गया।
प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि नामांतरण की प्रक्रिया एक कथित फर्जी शपथपत्र के आधार पर पूरी की गई, जिसमें मृत महिला को जीवित बताया गया था।
नियमों की अनदेखी का आरोप
जानकारी के अनुसार मृतका के पति स्वर्गीय मो. शर्फुद्दीन का भी पहले ही निधन हो चुका था। नियमानुसार ऐसी स्थिति में भूमि का नामांतरण कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम किया जाना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि नियमों को दरकिनार करते हुए किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भूमि को अवैध रूप से अपने नाम कराने का प्रयास किया गया।
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर यह भी जांच की जा रही है कि शपथपत्र किस आधार पर स्वीकार किया गया और नामांतरण की प्रक्रिया में किन स्तरों पर चूक हुई।
विवाद के बाद हुआ मामले का खुलासा
यह प्रकरण तब उजागर हुआ जब संबंधित भूमि को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद रिकॉर्ड की जांच की गई। दस्तावेजों की पड़ताल में मृत्यु प्रमाण पत्र और नामांतरण रिकॉर्ड के बीच स्पष्ट विरोधाभास सामने आया।
सदर एसडीएम ने लिया संज्ञान, जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) श्री विकास कुमार ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने जगदीशपुर अंचलाधिकारी एवं संबंधित थाना प्रभारी को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
एसडीएम ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस तरह की अनियमितताओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यदि जांच के दौरान किसी राजस्व कर्मी या अन्य अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संगठित गिरोह की आशंका, अन्य मामलों की जांच की मांग
प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित न होकर किसी संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है। स्थानीय लोगों एवं शिकायतकर्ता द्वारा मांग की गई है कि जिले में पिछले कुछ वर्षों में हुए नामांतरण मामलों की भी व्यापक जांच कराई जाए, ताकि यदि ऐसे अन्य फर्जी प्रकरण मौजूद हों तो उनका भी खुलासा हो सके।
प्रशासन ने दिया निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन
प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य आधारित होगी तथा दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।


