खबर के मुख्य बिंदु:
- मिशन शक्ति: अभियोजन निदेशालय (गृह विभाग) ने शुरू किया ‘महिला सुरक्षा’ पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- धारदार दलीलें: राज्य के विभिन्न जिलों से आए 25 अभियोजन पदाधिकारियों को किया जा रहा है प्रशिक्षित।
- लक्ष्य: महिलाओं से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय और संवेदनशीलता बढ़ाना।
- बड़ा संदेश: “यह केवल ट्रेनिंग नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का मिशन है।”
पटना: महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में दोषियों को सलाखों के पीछे पहुँचाने और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ी पहल की है। शनिवार को राजधानी पटना के अभियोजन निदेशालय में ‘महिला सुरक्षा’ विषय पर पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आगाज हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी वकीलों (अभियोजन पदाधिकारियों) की कार्यशैली को इतना ‘धारदार’ बनाना है कि अदालत में महिलाओं का पक्ष पूरी मजबूती और संवेदनशीलता के साथ रखा जा सके।
“किताबी ज्ञान नहीं, संवेदनशीलता है जरूरी”: पूर्व निदेशक शलिलेश कुमार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और पूर्व अभियोजन निदेशक श्री शलिलेश कुमार ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए एक बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने कहा:
”यह प्रशिक्षण केवल कानून की धाराएं रटने के लिए नहीं है। आपको अपने भीतर ऐसी मनोदृष्टि विकसित करनी होगी कि जब आपके सामने कोई पीड़ित महिला आए, तो आप उसके दर्द को समझें और उसे त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में काम करें। आपकी दलीलें इतनी धारदार होनी चाहिए कि न्याय मिलने में देरी न हो।”
25 अधिकारियों के साथ ‘सशक्तिकरण’ का मिशन
गृह विभाग के वरीय विधि पदाधिकारी श्री रंजीत शंकर प्रसाद ने इस कार्यक्रम को ‘महिला सशक्तिकरण का मिशन’ करार दिया।
- चयनित भागीदारी: इस 5 दिवसीय ट्रेनिंग में बिहार के अलग-अलग जिलों से नामित कुल 25 होनहार अभियोजन पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।
- कार्यशैली में सुधार: निदेशालय के उपनिदेशक डॉ. रविकान्त देव ने कार्यक्रम की रूपरेखा पेश करते हुए अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे वर्तमान विधियों का उपयोग कर महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए अपनी कार्यशैली को और सुदृढ़ करें।
त्वरित अवलोकन (Quick Facts)
- आयोजन: अभियोजन निदेशालय, गृह विभाग, बिहार।
- विषय: महिला सुरक्षा (Women’s Safety)।
- अवधि: 05 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (07 मार्च से शुरू)।
- प्रतिभागी: विभिन्न जिलों के 25 अभियोजन पदाधिकारी।
- प्रमुख उपस्थिति: डॉ. रविकान्त देव, रंजीत शंकर प्रसाद, धर्मेश कुमार (प्रभारी निदेशक)।
VOB का नजरिया: कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर न्याय की उम्मीद
अक्सर देखा गया है कि कानूनी पेचीदगियों और संवेदनशीलता की कमी के कारण महिलाओं से जुड़े मामलों में न्याय मिलने में लंबा समय लग जाता है। गृह विभाग की यह पहल सराहनीय है क्योंकि यह सीधे उन ‘अभियोजन पदाधिकारियों’ पर फोकस कर रही है जो कोर्ट में सरकार और पीड़ित का चेहरा होते हैं। अगर सरकारी वकील संवेदनशील और कानूनी रूप से अपडेट रहेंगे, तो अपराधियों में खौफ बढ़ेगा और महिलाओं का कानून पर भरोसा और मजबूत होगा।


