
बेगूसराय: मोबाइल के कैमरे से ‘परफेक्ट’ सेल्फी लेने की सनक ने एक बार फिर एक हँसते-खेलते नौजवान की जिंदगी में अंधेरा भर दिया है। बरौनी-कटिहार रेलखंड पर साहेबपुर कमाल स्टेशन के पास रविवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जहाँ चलती ट्रेन के गेट पर सेल्फी ले रहा एक युवक नीचे गिर गया और उसके दोनों पैर कटकर अलग हो गए। लेकिन इस हादसे से भी ज्यादा भयावह वह मंजर था, जहाँ लोग मदद के बजाय अपने मोबाइल से तड़पते युवक का वीडियो बनाने में मशगूल थे।
एक लापरवाही और जिंदगी भर का दर्द
हादसा साहेबपुर कमाल रेलवे स्टेशन के पूरब स्थित रेलवे गुमटी (केबिन) के पास हुआ।
- युवक की पहचान: घायल युवक की पहचान बेगूसराय जिले के लाखो थाना क्षेत्र के बाजितपुर गांव निवासी सूरज कुमार (25 वर्ष), पिता इंदल पासवान के रूप में हुई है।
- कैसे हुआ हादसा: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सूरज ट्रेन के पायदान (गेट) पर खड़ा होकर मोबाइल से सेल्फी ले रहा था। ट्रेन की रफ्तार और हवा के झोंके के बीच उसका संतुलन बिगड़ा और वह सीधे पटरी के नीचे आ गया। ट्रेन गुजरने के बाद युवक के दोनों पैर शरीर से अलग हो चुके थे।
कैमरा चालू रहा, पर संवेदना सो गई!
इस घटना ने समाज की बदलती और संवेदनहीन मानसिकता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
- वीडियो का तमाशा: जैसे ही ट्रेन गुजरी, भीड़ तो जमा हुई, लेकिन अधिकांश लोग अपने फोन निकालकर घायल सूरज की बेबसी और उसके कटे हुए पैरों का वीडियो बनाने लगे।
- फरिश्ता बनकर आए सम्मी: जब लोग ‘लाइक्स’ और ‘शेयर’ के लिए वीडियो बना रहे थे, तब स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सम्मी कुमार ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने बिना समय गंवाए घायल युवक को उठाया और तत्काल साहेबपुर कमाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुँचाया, जहाँ उसका इलाज जारी है।
त्वरित अवलोकन (Quick Facts)
- स्थान: साहेबपुर कमाल रेलवे स्टेशन के समीप, बेगूसराय।
- पीड़ित: सूरज कुमार (25 वर्ष)।
- कारण: चलती ट्रेन के गेट पर सेल्फी लेना।
- परिणाम: दोनों पैर कटकर शरीर से अलग।
- मददगार: सामाजिक कार्यकर्ता सम्मी कुमार।
VOB का नजरिया: क्या ‘लाइक्स’ जान से ज्यादा कीमती हैं?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करता है। चलती ट्रेन में स्टंट करना या गेट पर लटककर सेल्फी लेना बहादुरी नहीं, सरासर मूर्खता है। लेकिन उससे भी बड़ी मूर्खता और पाप वह है, जब आप किसी को मरते हुए देखकर कैमरा खोल लेते हैं। समाज को सोचना होगा कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। सम्मी कुमार जैसे लोग आज भी उम्मीद की किरण हैं, लेकिन वीडियो बनाने वाली भीड़ को अपनी आत्मा को टटोलने की जरूरत है।


