मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के ग्रामीण प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि राज्य के 8053 पंचायतों में नए पंचायत भवन का निर्माण किया जाएगा। ये भवन पूरी तरह से मिनी सेक्रेटेरियट की तरह विकसित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीणों को आधारभूत सरकारी सेवाओं के लिए प्रखंड और अनुमंडल कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े।
डिजिटाइज्ड सुविधाओं से लैस होंगे पंचायत भवन
विभागीय जानकारी के मुताबिक नए पंचायत भवनों में आधुनिक और डिजिटाइज्ड सिस्टम उपलब्ध रहेंगे। ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे मिलेगी ये सुविधाएं—
- जाति, आय, आवासीय, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र
- सरकारी कार्डों के लिए आवेदन
- विभिन्न योजनाओं का सत्यापन
- ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग
- शिकायत और जन-सुनवाई की सुविधा
ये भवन केवल प्रशासनिक केंद्र ही नहीं होंगे बल्कि बहुउद्देशीय उपयोग के लिए डिजाइन किए जा रहे हैं, जहां पंचायत स्तर पर बैठकें, प्रशिक्षण, सामुदायिक कार्यक्रम और जन-सुनवाई भी आयोजित की जा सकेगी।
CM नीतीश का लक्ष्य: गांवों को शहरी जैसी सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि गांव शहरी क्षेत्रों की तरह आत्मनिर्भर बनें।
“हर व्यक्ति को सम्मान के साथ अपने जरूरी कार्य निपटाने की सुविधा मिले— यही सरकार की प्राथमिकता है,” उन्होंने कहा।
8000 पंचायतों में खुले हाई स्कूल
सशक्त पंचायत और मजबूत शिक्षा व्यवस्था की दिशा में सरकार ने लगभग 8000 पंचायतों में हाई स्कूल शुरू किए हैं।
- ग्रामीण व शहरी छात्राओं को साइकिल और पोशाक की सुविधा
- शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधार
- 20 वर्षों में मजबूत और शिक्षित बिहार के लक्ष्य की ओर तेज़ प्रगति
सरकार की इन पहल के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और प्रशासन दोनों स्तरों पर बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।
पंचायत भवन बनेगा नया प्रशासनिक केंद्र
सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी विनीत सिन्हा ने बताया कि नए पंचायत भवनों को मिनी सेक्रेटेरियट की तरह उपयोग में लाने की तैयारी है।
इन भवनों को इस प्रकार बनाया जा रहा है कि—
- ग्रामीणों के कार्य त्वरित गति से हों
- प्रशासनिक गतिविधियाँ पंचायत स्तर पर ही पूरी की जा सकें
- लोगों का समय और पैसा दोनों बचे


