
समाचार के मुख्य बिंदु: पारिवारिक विवाद में विधायक की एंट्री और खाकी पर भी सवाल
- गंभीर आरोप: भागलपुर के नाथनगर विधायक मिथुन यादव पर उनके ही गोतिया (परिवार के सदस्यों) ने हथियार के बल पर जमीन कब्जाने और मारपीट करने का संगीन आरोप लगाया है।
- वायरल साक्ष्य: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें एक लग्जरी गाड़ी से उतरे कुछ लोग ग्रामीणों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट करते दिख रहे हैं। आरोप है कि यह गाड़ी विधायक की है।
- पीड़ित की दास्तान: किशनपुर निवासी सुबोध यादव को खेत पर जाने के दौरान बुरी तरह पीटने का दावा किया गया है। घायल की पत्नी पिंकी देवी ने न्याय की गुहार लगाई है।
- खाकी की भूमिका: आरोपों के घेरे में बिहार पुलिस के जवान धर्मेंद्र उर्फ उपनातू यादव भी हैं, जिन पर विधायक का साथ देने का आरोप है।
- विरासत का विवाद: यह जमीन विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि पिछले 50 वर्षों से (विधायक के पिता के समय से) चला आ रहा है।
- करोड़ों का दांव: विवाद का केंद्र नाथनगर की डेढ़ बीघा जमीन है, जिसकी बाजार दर करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।
- इनसाइट: बिहार की ग्रामीण राजनीति में ‘जमीन’ और ‘गोतिया’ (परिवार) के झगड़े अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं, लेकिन जब इसमें एक वर्तमान विधायक का नाम सीधे तौर पर जुड़ जाए, तो यह केवल पारिवारिक विवाद नहीं रह जाता। वायरल वीडियो ने इस मामले को ‘कानून-व्यवस्था’ बनाम ‘विधायकी रसूख’ की बहस में बदल दिया है। हालांकि, यह भी गौर करने वाली बात है कि गोतिया विवाद में आरोप अक्सर एकतरफा और अतिरंजित भी हो सकते हैं, इसलिए पुलिस की निष्पक्ष जांच ही दूध का दूध और पानी का पानी करेगी।
भागलपुर | 29 मार्च, 2026
भागलपुर जिले का नाथनगर क्षेत्र इन दिनों एक ऐसे हाई-प्रोफाइल विवाद की चपेट में है, जिसने स्थानीय सियासत और सामाजिक ताने-बाने को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहां सरकार ‘भूमि सुधार’ और ‘सुशासन’ की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ नाथनगर विधायक मिथुन यादव पर लगे जमीन हड़पने और मारपीट के आरोपों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह मामला अब केवल एक जमीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि ‘मान और सम्मान’ की उस लड़ाई में तब्दील हो गया है जिसमें अपनों ने ही अपनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
खेत पर ‘रणक्षेत्र’: पिंकी देवी का बयान और वायरल वीडियो की हकीकत
घटनाक्रम की शुरुआत शनिवार को उस समय हुई जब किशनपुर निवासी सुबोध यादव रोज की तरह अपने खेत की निगरानी करने गए थे। उनकी पत्नी पिंकी देवी के अनुसार, वहां अचानक विधायक मिथुन यादव के समर्थकों और बाउंसरों की एक टीम पहुँची। पिंकी देवी ने आरोप लगाया कि इन लोगों ने सुबोध यादव को चारों ओर से घेर लिया और उन पर जमीन बेचने के लिए दबाव बनाना शुरू किया।
मारपीट की पटकथा:
आरोप है कि जब सुबोध ने करोड़ों की इस पैतृक जमीन को बेचने या विधायक के पक्ष में करने से इनकार किया, तो वहां मौजूद लोगों ने उन पर हमला कर दिया। पिंकी देवी ने सीधे तौर पर कहा कि विधायक ने उनके पति को धमकी दी थी कि “जमीन बेच दो, नहीं तो मारपीट होगी।” इस मारपीट का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें एक सफेद रंग की गाड़ी (जिसे विधायक की बताया जा रहा है) से कुछ युवक उतरते हैं और वहां मौजूद लोगों के साथ हिंसक व्यवहार करते नजर आते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन पुलिस के लिए यह वीडियो एक महत्वपूर्ण साक्ष्य (Evidence) साबित हो सकता है।
धर्मेंद्र यादव पर भी लगे आरोप
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला नाम धर्मेंद्र उर्फ उपनातू यादव का सामने आया है। पिंकी देवी का दावा है कि धर्मेंद्र, जो वर्तमान में बिहार पुलिस में कार्यरत हैं, वर्दी की धौंस और विधायक के साथ अपने संबंधों का फायदा उठाकर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि यह आरोप सच साबित होता है, तो यह बिहार पुलिस की छवि पर एक बड़ा धब्बा होगा कि एक कानून का रक्षक ही भू-माफिया की तरह व्यवहार कर रहा है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्हें हथियार दिखाकर डराया-धमकाया जा रहा है। डेढ़ बीघा जमीन, जो सड़क किनारे होने के कारण बेहद कीमती है, उसे हथियाने के लिए विधायक और उनके लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
50 साल पुरानी रंजिश: पिता से पुत्र तक हस्तांतरित विवाद
यह बात सामने आई है कि यह विवाद केवल वर्तमान विधायक मिथुन यादव के कार्यकाल की उपज नहीं है। पिंकी देवी के अनुसार, यह लड़ाई पिछली आधी सदी से चली आ रही है। यह विवाद विधायक के पिता के समय में शुरू हुआ था और अब दूसरी पीढ़ी भी इसी ‘अहं’ और ‘जमीन’ की लड़ाई को आगे बढ़ा रही है।
आमतौर पर ‘गोतिया’ विवादों में जमीन का बंटवारा एक जटिल प्रक्रिया होती है, लेकिन यहाँ आरोप है कि विधायक अपने पद की शक्ति का उपयोग कर उस बंटवारे को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। 50 साल पुराना यह घाव अब नासूर बन चुका है, जो रह-रहकर हिंसक झड़पों के रूप में सामने आ रहा है।
समतुल्य नजरिया: क्या यह केवल राजनीतिक साजिश है?
जहां पीड़ित पक्ष ने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं संतुलित दृष्टिकोण से इस मामले को देखना भी आवश्यक है।
- विधायक का पक्ष: मिथुन यादव की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनके समर्थकों का मानना है कि यह उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने की साजिश हो सकती है। गोतिया विवाद में अक्सर आपसी रंजिश को ‘विधायकी रसूख’ से जोड़कर पेश किया जाता है ताकि मामला सुर्खियों में आए।
- पुलिस की निष्क्रियता: अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या एफआईआर की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। यह जांच का विषय है कि क्या पुलिस पर कोई राजनीतिक दबाव है या वह साक्ष्यों का मिलान कर रही है।
- करोड़ों की जमीन का लालच: डेढ़ बीघा जमीन की कीमत करोड़ों में होने के कारण दोनों पक्षों के दावे काफी मजबूत और आक्रामक हैं।


