दिल्ली में इतनी बारिश की टूट गया 41 साल का रिकॉर्ड, मंत्रियों और सांसदों के घरों में भी घुसा पानी

दिल्ली में पिछले दो दिनों से जमकर बारिश हो हुई है। बारिश ने पिछले 41 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। सड़कें सड़कें कम नदियां ज्यादा लग रही हैं। गाडियां डूब चुकी हैं। घरों में पानी घुस चुका है। पानी केवल आम लोगों के घरों में नहीं बल्कि सांसद, विधायक और मंत्रियों के घरों में भी पहुंच चुका है। कई जगहों पर तो जलस्तर घुटनों तक हो चुका है। बारिश से पहले दिल्ली सरकार और MCD ने कहा था कि इस बार दिल्ली बारिश से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है लेकिन मानसून के आते ही पोल खुल गई।

9 जुलाई को सुबह आठ बजे तक 153 एमएम बारिश दर्ज हुई

रविवार को भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया कि राजधानी में रविवार 9 जुलाई को सुबह आठ बजे तक 153 एमएम बारिश दर्ज हुई। इससे पहले 25 जुलाई 1982 को 169.9 एमएम बारिश की गई थी। ऐसे में 41 साल बाद दिल्ली में इतनी ज्यादा बारिश हुई है। वहीं पिछले 33 घंटे में 258.8 एमएम से भी ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं IMD ने सोमवार 10 जुलाई के लिए भी दिल्ली में बारिश का ओरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, शाम साढ़े पांच बजे तक लोधी रोड इलाके में सबसे ज्यादा 116.1 एमएम बारिश दर्ज हुई। वहीं सफदरजंग  इलाके में 106 एमएम बारिश दर्ज की गई।

कई इलाकों में तो दीवारें तक गिर गईं

बारिश की वजह से जहां तमाम लोग परेशान हैं तो बच्चे सड़क पर जमा पानी में खेलते हुए पूरी दिल्ली में नजर आ रहे हैं। वे जमा हुए पानी में जमकर मजे ले रहे हैं। वहीं कई इलाकों में तो दीवारें तक गिर गईं। हालात को बिगड़ता हुआ देख मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों को कहा कि वे प्रभावित इलाकों में जाकर स्थिति का मुआयना करें और हालत सुधारें। जिसके बाद PWD मंत्री आतिशी सुबह से ही सड़कों पर नजर आ रही थीं।

जहां एकतरफ आतिशी सड़कों पर उतरकर दिल्ली की बिगड़ी हुई हालत को देख रही थीं तो वहीं दूसरी तरफ उनके सरकारी आवास में बारिश का पानी प्रवेश कर चुका था। आज दिल्ली में इतनी भयानक बारिश हुई कि VIP इलाकों की भी पोल खुल गई। देश का सबसे VIP इलाका माना जाने वाला लुटियंस के कई बंगलों में पानी घुसने की खबर दिनभर आती रहीं।

देश की प्रशासनिक सेवा में बैठे बड़े-बड़े अफसरों को भी दिल्ली की बारिश ने नहीं बख्सा। उसने उनके घरों में भी दस्तक दे दी। जिस जमीन पर महंगी टाइलें गुमान करती थीं, वहां अब तलब बन हुआ दिख रहा था। सड़कों और नालों में कोई फर्क ही नजर नहीं आ रहा था।

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