
नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर जोरदार बहस शुरू हुई। चर्चा की शुरुआत से पहले ही विपक्ष ने गृह मंत्री की अनुपस्थिति को लेकर हंगामा किया। हालांकि, शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कानून है और इस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह 2024 में लागू किए गए कानून को और अधिक प्रभावी बनाने वाला संशोधन है। उन्होंने दावा किया कि यह देश के छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को मजबूत करता है कि किसी भी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
विपक्ष का पलटवार: “2024 का कानून था, फिर पेपर लीक कैसे हुए?”
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 2024 का कानून इतना सख्त था, तो उसके बाद भी देशभर में पेपर लीक की घटनाएं कैसे होती रहीं? उन्होंने पूछा कि पेपर लीक के आरोपियों को जमानत कैसे मिली और इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि एनटीए से हटाए गए 474 कर्मचारियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए और यह बताया जाए कि पेपर लीक मामलों में अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है।
NTA और शिक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि एनटीए में नियुक्तियों और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से सबसे अधिक नुकसान उन लाखों छात्रों का हुआ है जिन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा दी। उनके अनुसार, सरकार शिक्षा को केवल राजनीतिक मुद्दा बनाकर देख रही है, जबकि छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है।
“शिक्षा नहीं, सिर्फ वोट की राजनीति”
गौरव गोगोई ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का भरोसा तोड़ा है। उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने अपने भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और लाठियां तक खाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय केवल राजनीतिक लाभ लेने में जुटी हुई है।
अब इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा जारी है। बहस के दौरान कई अन्य सांसद भी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने की व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे।


