
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव अपने अलग अंदाज को लेकर चर्चा में रहे। वह संसद परिसर में माथे पर मेडिकल प्लास्टर और हाथ में लाठी लेकर पहुंचे तथा हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।
मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने जंतर-मंतर, बिहार समेत विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित बल प्रयोग का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है और उनकी मांगों को सुनने के बजाय उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। पप्पू यादव ने छात्रों को न्याय दिलाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
‘छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं’
पप्पू यादव ने कहा कि छात्रों के साथ हो रही कार्रवाई किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए।
मिथिला पाग विवाद पर भी उठाए सवाल
पप्पू यादव ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मिथिला पाग पहनाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा का अपमान बताते हुए कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे के बाद इस तरह का सम्मान उचित संदेश नहीं देता।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि मिथिला पाग का सम्मान बनाए रखा जाना चाहिए और इसकी गरिमा से समझौता नहीं होना चाहिए।
संसद के बाहर पप्पू यादव का यह विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जबकि मानसून सत्र के दौरान पेपर लीक, छात्र आंदोलन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस जारी है।


